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जम्मू-कश्मीर भाषा बिल से पंजाबी भाषा को बाहर करने का विरोध
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर भाषा बिल से पंजाबी भाषा को बाहर निकालने का सख्त नोटिस लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि इस भाषा बिल पर पुनर्विचार करें। लौंगोवाल ने पंजाब के सभी लोकसभा और राज्य सभा के सांसदों से भी आग्रह किया है कि वह 14 सितंबर को शुरू होने वाले संसद के सत्र में जम्मू-कश्मीर के भाषा बिल में पंजाबी भाषा को शामिल करने के लिए आवाज उठाएं।
लौंगोवाल के अनुसार इससे पहले जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। जम्मू-कश्मीर के संविधान में पंजाबी भाषा को पहले ही मान्यता मिली हुई थी। केंद्र के वर्र्तमान भाषा बिल में पंजाबी को नजरअंदाज कर उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा को स्वीकार करना उचित नहीं है। जम्मू-कश्मीर में बसे लाखों लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं। नए भाषा बिल से पंजाबी बोलने वाले लाखों लोगों को ठेस पहुंची है। जम्मू-कश्मीर में पहले ही सिखों को अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किया हुआ है। इस बिल को लागू कर सिखों के साथ एक और धक्का किया गया है। केंद्र को जम्मू-कश्मीर के सिखों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए।
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लौंगोवाल के अनुसार इससे पहले जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। जम्मू-कश्मीर के संविधान में पंजाबी भाषा को पहले ही मान्यता मिली हुई थी। केंद्र के वर्र्तमान भाषा बिल में पंजाबी को नजरअंदाज कर उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा को स्वीकार करना उचित नहीं है। जम्मू-कश्मीर में बसे लाखों लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं। नए भाषा बिल से पंजाबी बोलने वाले लाखों लोगों को ठेस पहुंची है। जम्मू-कश्मीर में पहले ही सिखों को अल्पसंख्यकों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित किया हुआ है। इस बिल को लागू कर सिखों के साथ एक और धक्का किया गया है। केंद्र को जम्मू-कश्मीर के सिखों की भावनाओं की कद्र करनी चाहिए।
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