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श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में धूमधाम से मनाया गया होली का त्योहार
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अमृसर। श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में रंगों का त्योहार होली महोत्सव शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। होली के अवसर पर दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए और होली महोत्सव मनाया।
लक्ष्मणसर चौक स्थित इस्कॉन मंदिर के रुद्र दास ने बताया कि वे सभी होली खेलने आए हैं, वहां का माहौल उन्हें बहुत अच्छा लगा। उनका कहना है कि वे हर साल यहां होली मनाने आते हैं। भगवान श्री कृष्ण के समय से हिंदू इस त्योहार को मनाते चले आ रहे हैं।
श्री दुर्ग्याणा मंदिर में लक्ष्मी नारायण के साथ होली खेलने पहुंची काव्या श्रीवास्तव ने बताया कि वे पिछले 7 वर्षों से लगातार अपने परिवार के साथ होली खेलने आती रहीं हैं। इस बार भी वे भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के साथ होली खेलने आई हैं और यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
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अमृतसर की राबिया ने बताया कि वे बचपन से ही अपने परिवार के साथ यहां ठाकुर जी के साथ होली खेलने आती रही हैं। अब तो शादी हो गई है और हमेशा की तरह यहां होली मनाने आती हैं। उन्होंने बताया कि श्री दुर्ग्याणा मंदिर में ठाकुर जी के साथ होली खेलकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि होली पर पक्के रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, केवल हर्बल रंगों से ही खेलनी चाहिए।
प्रदीप पुरी ने बताया कि बहुत अच्छा लग रहा है। कोविड काल के बाद यहां इस त्योहार को मनाने का उन्हें बहुत आनंद आया। वे 10-12 वर्षों से यहां लगातार आकर होली खेलते हैं और भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि पानी की होली नहीं खेलनी चाहिए।
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लक्ष्मणसर चौक स्थित इस्कॉन मंदिर के रुद्र दास ने बताया कि वे सभी होली खेलने आए हैं, वहां का माहौल उन्हें बहुत अच्छा लगा। उनका कहना है कि वे हर साल यहां होली मनाने आते हैं। भगवान श्री कृष्ण के समय से हिंदू इस त्योहार को मनाते चले आ रहे हैं।
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श्री दुर्ग्याणा मंदिर में लक्ष्मी नारायण के साथ होली खेलने पहुंची काव्या श्रीवास्तव ने बताया कि वे पिछले 7 वर्षों से लगातार अपने परिवार के साथ होली खेलने आती रहीं हैं। इस बार भी वे भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के साथ होली खेलने आई हैं और यहां आकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
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अमृतसर की राबिया ने बताया कि वे बचपन से ही अपने परिवार के साथ यहां ठाकुर जी के साथ होली खेलने आती रही हैं। अब तो शादी हो गई है और हमेशा की तरह यहां होली मनाने आती हैं। उन्होंने बताया कि श्री दुर्ग्याणा मंदिर में ठाकुर जी के साथ होली खेलकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि होली पर पक्के रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, केवल हर्बल रंगों से ही खेलनी चाहिए।
प्रदीप पुरी ने बताया कि बहुत अच्छा लग रहा है। कोविड काल के बाद यहां इस त्योहार को मनाने का उन्हें बहुत आनंद आया। वे 10-12 वर्षों से यहां लगातार आकर होली खेलते हैं और भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने कहा कि पानी की होली नहीं खेलनी चाहिए।