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अमृतसर: देश बंटवारे में भाई से बिछड़ने वाले हबीब पाकिस्तान रवाना, कहा- दो माह रहूंगा, अबकी बार रोऊंगा नहीं
Sun, 27 Mar 2022 06:24 PM IST
ajay kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 27 Mar 2022 06:24 PM IST
सार
जनवरी 2022 में मिलने पर तो वह लोग एक-दूसरे से लिपटकर खूब रोए थे लेकिन अब वह पाकिस्तान जाकर रोएंगे नहीं बल्कि अपने भाई सिद्दकी और उनके परिवार के साथ खुशियां बांटेंगे और बचपन की यादें साझा करेंगे।
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- फोटो : फाइल
विस्तार
देश के बंटवारे के समय बिछड़ने और जनवरी 2022 में श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर में मिले हबीब अपने भाई से मिलने शनिवार देर शाम जेसीपी अटारी से जीरो लाइन पार कर पाकिस्तान पहुंचे। श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर में मिलने के बाद दोनों भाई फूले नहीं समा रहे थे। अब हबीब अपने बचपन की यादों को ताजा करने पाकिस्तान गए हैं। वहां वह दो माह रहेंगे और अपनी यादें साझा करेंगे।
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अटारी सीमा से जीरो लाइन पार कर पाकिस्तान जाने से पहले हबीब ने बताया कि दोनों भाइयों को बिछड़े 74 साल हो गए। उन्हें आज भी वो दिन याद है, जब एक दिन चरमपंथियों की भीड़ ने हमला किया था। तब उनके भाई सिद्दकी को परिवार के साथ पाकिस्तान जाना पड़ा था और वह भारत में ही रह गए थे।
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उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी में जब श्री करतारपुर साहिब गए तो वाहेगुरु ने उनके बिछड़े भाई सिद्दकी से उन्हें मिला दिया। तब वह अपने भाई के साथ बहुत ज्यादा बातें नहीं कर सके थे। अब वह दो माह का वीजा लेकर अपने भाई के पास पाकिस्तान जा रहे हैं। जनवरी 2022 में मिलने पर तो वह लोग एक-दूसरे से लिपटकर खूब रोए थे लेकिन अब वह पाकिस्तान जाकर रोएंगे नहीं बल्कि अपने भाई सिद्दकी और उनके परिवार के साथ खुशियां बांटेंगे और बचपन की यादें साझा करेंगे। वाघा रवाना होने से पहले उन्होंने दोनों देशों की सरकार से अपील की है कि दोनों देशों के लोग आपस में मिलना चाहते हैं। इसलिए आने -जाने की प्रक्रिया को आसान बनाएं ताकि लोग आसानी से भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत आ-जा सकें।
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ऐसे बिछड़े थे दोनों भाई
यह दोनों भाई 1947 के विभाजन के समय अलग हो गए थे। बठिंडा जिले के गांव फूलेवाला के रहने वाले हबीब खान उर्फ सिका खान ने बताया कि उनका गांव जगरांव के पास कोठे था। देश के दो टुकड़े होने के दौरान वह उस समय दो साल के थे और अपनी मां के साथ अपने ननिहाल गांव फूलेवाला आ गया था। बंटवारे के दौरान शुरू हुए खून खराबे के बीच उसका भाई मुहम्मद सिद्दकी और बहन पिता के साथ पाकिस्तान रवाना हो गए और वह अपनी मां के साथ यहीं रह गया। यहां गांव के लोगों ने दोनों को छिपाकर उनकी जान बचाई थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जाते समय उनकी बहन की मौत हो गई जबकि पिता और भाई किसी तरह पाकिस्तान पहुंच गए।
80 साल के मुहम्मद सिद्दकी पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वो बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई थीं। वो भावुक होकर गले मिले थे। इसी मुलाकात में ही सिका खान को यह भी पता चला था कि जन्म के समय उनका नाम हबीब खान रखा गया था।