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गर्व की बात: अमृतसर के जसवंत सिंह को मिलेगा कोहिनूर-ए-हिंद, रानीगंज खान से 65 लोगों को बचाकर पाई थी शोहरत

Mon, 25 Nov 2024 03:06 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 25 Nov 2024 03:06 PM IST
सार

अमृतसर के इंजीनियर जसवंत सिंह गिल ने 1989 में पश्चिम बंगाल की रानीगंज कोयला खदान में फंसे 65 मजदूरों को निकाला था। उसमें इस्तेमाल कैप्सूल की रेप्लिका को अमृतसर के चौक पर लगाया गया है। 

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Engineer Jaswant Singh of Amritsar will get Kohinoor-e-Hind
इंजी. जसवंत सिंह गिल - फोटो : फाइल

विस्तार

अमृतसर के इंजी. जसवंत सिंह गिल को मरणोपरांत 26 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि पर कोहिनूर-ए-हिंद का खिताब दिया जा रहा है। बंगलुरू में कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और इसरो के चेयरमैन डॉ. किरण कुमार गिल के बेटे डॉ. सरप्रीत सिंह गिल को खिताब देकर सम्मानित करेंगे। 
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बता दें कि इंजी. जसवंत सिंह गिल को मरणोपरांत यह अवॉर्ड देश की मदर इंडिया केयर ट्रस्ट की ओर से दिया जाना है। डॉ. सरप्रीत सिंह ने कहा कि उनके पिता इंजी. जसवंत सिंह गिल की इस बहादुरी के लिए 1991 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने उनको सर्वोत्तम रक्षा पदक से नवाजा था। उनको 3 बार लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और देश के दूसरे राज्यों की सरकारों ने सम्मान दिया।
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2023 में बनी थी फिल्म- मिशन रानीगंज

डॉ. सरप्रीत गिल ने कहा कि माइनिंग की पढ़ाई में अब उनके पिता की ओर से उस समय तैयार की गई तकनीक को शामिल किया गया है। यहां तक कि 2023 में उन पर 100 करोड़ बजट की फिल्म मिशन रानीगंज बनाई गई थी, जिसमें उनके पिता का किरदार अभिनेता अक्षय कुमार ने निभाया था। फिल्म के रिलीज होने से पहले ही उनका 26 नवंबर 2019 को निधन हो गया था।

1989 में खान में फंसे थे 65 मजदूर

डॉ. गिल ने कहा कि उनके पिता 1989 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज में मुख्य माइनिंग अफसर के रूप में तैनात थे। वहां महाबीर खान में नवंबर के दूसरे हफ्ते में पानी और गैस भरने लगी। खान में 350 फीट नीचे 65 मजदूर फंसे थे। गिल ने उनको निकालने की जिम्मेदारी ली, लेकिन सरकार नहीं मानी। आखिरकार अपनी योजना मुताबिक लोहे का कैप्सूल बनाया और उसी के रास्ते खुद नीचे गए। वहां से एक-एक कर सभी को बाहर निकाला, फिर खुद निकले थे।
 
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