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गुरबाणी-हुक्मनामा के प्रसारण का विवाद पहुंचा अकाल तख्त, चैनल का दावा- हमारे पास अधिकार

Tue, 14 Jan 2020 10:39 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 14 Jan 2020 10:39 AM IST
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dispute over gurbani broadcast
Golden Temple, Amritsar - फोटो : Pixabay
श्री हरमंदिर साहिब से सुबह शाम प्रसारित होने वाली गुरबाणी और हुक्मनामा को लेकर पैदा हुआ विवाद श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच गया है। एक निजी टीवी चैनल द्वारा अलग-अलग पंजाबी टीवी चैनलों को हुक्मनामा का प्रसारण करने पर नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में इन टीवी चैनलों को हुक्मनामा के प्रसारण के लिए भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। टीवी चैनल का दावा है कि गुरबाणी व हुक्मनामा के प्रसारण के अधिकार उनके पास हैं। इस संदर्भ में एसजीपीसी व उनकी कंपनी के बीच एक समझौता हुआ है।
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इसके विरोध में सिख संगत ने जत्थेदार अकाल तख्त को भेजी शिकायतों में कहा कि सचखंड से गुरबाणी का प्रसारण किसी की मलकियत नहीं है। जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निजी टीवी चैनल व एसजीपीसी को निर्देश जारी किए हैं कि गुरबाणी व हुक्मनामा के प्रसारण को लेकर जो भी समझौता हुआ है, उसके दस्तावेज श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय भेजे जाएं। श्री अकाल तख्त साहिब के सूत्रों के अनुसार, संगत की शिकायतों पर जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है।
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बीर दविंदर सिंह ने भी जत्थेदार को लिख पत्र

शिअद (टकसाली) के सीनियर उपाध्यक्ष और विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर सिंह ने भी टीवी चैनल द्वारा गुरुबाणी के प्रसारण पर अपना हक जताने के मामले में जत्थेदार हरप्रीत सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि शबद सिख चेतना के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा व सिखों की कुल रचना का बुनियादी स्त्रोत है। गुरबाणी व हुक्मनामा पर किसी का भी निजी अधिकार नहीं हो सकता। टीवी चैनल व एसजीपीसी के बीच गुरबाणी प्रसारण को लेकर क्या समझौता हुआ है, उसे सार्वजनिक किए जाना चाहिए।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संदेश सभी के लिए है, किसी कॉरपोरेट हाउस को इसका एकाधिकार नहीं दिया जा सकता। गुरबाणी की ऑडियो-वीडियो एसजीपीसी की वेबसाइट पर इसलिए अपलोड की जाती है, ताकि दुनिया भर ने बसे नानक नाम लेवा उसको श्रवण कर सकें। निजी टीवी चैनल इस पर एसजीपीसी को कैसे निर्देश जारी कर सकती है। लोक इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि निजी टीवी चैनल गुरबाणी पर अपने अधिकार का गलत दावा पेश कर रही है। किसी के पास भी गुरबाणी बेचने का अधिकार नहीं है।

बीबी जागीर कौर के कार्यकाल में हुआ था समझौता

2000 में तत्कालीन एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर और निजी टीवी चैनल ईटीसी के बीच श्री हरमंदिर साहिब से गुरबाणी प्रसारण को लेकर समझौता हुआ था। यह समझौता दस वर्ष के लिए था। तब बीबी जागीर कौर ने इस टीवी चैनल के मालिक के साथ मिलकर एक पत्रकार सम्मेलन में इस समझौते की जानकारी दी थी। इसमें कहा गया था कि टीवी चैनल के कुल राजस्व का बड़ा हिस्सा एसजीपीसी को मिलेगा। सात वर्ष तक इस टीवी चैनल ने गुरबाणी का प्रसारण किया।

इसके बदले में एसजीपीसी को कितना राजस्व मिला, इसकी जानकारी कभी संगत को नहीं दी गई। 2007 में जब पंजाब में शिअद-भाजपा सरकार का गठन हुआ तो पीटीसी चैनल से गुरबाणी का प्रसारण शुरू हो गया। एसजीपीसी और पीटीसी चैनल के बीच प्रसारण को लेकर क्या समझौता हुआ, इसकी जानकारी कभी नहीं दी गई। पिछले 13 साल से सचखंड से किए जा रहे प्रसारण में एसजीपीसी को कितना राजस्व मिला, इसकी जानकारी भी कहीं नहीं है।

सभी टीवी चैनलों को मिले प्रसारण के अधिकार
श्री गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के मुख्य कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब विधानसभा का एक विशेष अधिवेशन बुलाया था। इस अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि श्री हरमंदिर साहिब में गुरबाणी प्रसारण के अधिकार सभी टीवी चैनलों को दिए जाने चाहिए। सरकार ने इस प्रस्ताव को एसजीपीसी को भी भेजा था जिस पर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है।
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