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क्राईम ब्रांच ने ऐतराज के चलते नई कापियां उपलब्ध करवाई
Updated Fri, 06 Jul 2018 10:29 PM IST
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कठुआ केस, सभी केंद्र
क्राइम ब्रांच ने ऐतराज के कारण नई कापियां उपलब्ध कराईं
कठुआ केस में बचाव पक्ष बोला: गवाह ने माना मृतका उसकी बेटी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट (गुरदासपुर)। कठुआ दुराचार और हत्या के मामले में शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने बचाव पक्ष के वकीलों की जिरह के कारण नई कापियां उपलब्ध करवा दीं। यह जानकारी देते हुए वकील एके साहनी ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने एतराज के कारण उर्दू की सभी कापियां माननीय कोर्ट और बचाव पक्ष को अंग्रेजी में उपलब्ध करवा दी हैं। जिसमें केस दायर करने की तिथि पहले 12 बताई गई थी, जोकि 11 निकली। चार्जशीट का पेज नंबर 422 भी नहीं जमा कराया गया था, वह भी उपलब्ध करा दिया गया। इसमें माना कि उनसे अंजाने में यह गलती हुई। वकील साहनी ने कहा कि वे अब क्राइम ब्रांच के खिलाफ केस करेंगे।
उधर, बचाव पक्ष के वकीलों से यह भी पता चला कि गवाह, जो कि मृतका को अपनी बेटी बताता आ रहा था, उससे जब पूछा गया कि मृतका का जन्म कब हुआ, कहां हुआ, तो उसने कबूला कि मृतका उसकी असली बेटी नहीं है। वह रिश्ते में उसका मामा लगता था। इस पर बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि मुसलमानों में गोद लेने देने का कानून नहीं है और अदालत को गुमराह किया जा रहा है। जिरह में यह भी सामने आया कि मृतका के मरने की सूचना उसके असली माता पिता को नहीं दी गई। केस होने के बाद पता चला मृतका के असली मां बाप डर के मारे कहीं और चले गए हैं, जिनका अभी पता नहीं लग पाया है।
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क्राइम ब्रांच ने ऐतराज के कारण नई कापियां उपलब्ध कराईं
कठुआ केस में बचाव पक्ष बोला: गवाह ने माना मृतका उसकी बेटी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट (गुरदासपुर)। कठुआ दुराचार और हत्या के मामले में शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने बचाव पक्ष के वकीलों की जिरह के कारण नई कापियां उपलब्ध करवा दीं। यह जानकारी देते हुए वकील एके साहनी ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने एतराज के कारण उर्दू की सभी कापियां माननीय कोर्ट और बचाव पक्ष को अंग्रेजी में उपलब्ध करवा दी हैं। जिसमें केस दायर करने की तिथि पहले 12 बताई गई थी, जोकि 11 निकली। चार्जशीट का पेज नंबर 422 भी नहीं जमा कराया गया था, वह भी उपलब्ध करा दिया गया। इसमें माना कि उनसे अंजाने में यह गलती हुई। वकील साहनी ने कहा कि वे अब क्राइम ब्रांच के खिलाफ केस करेंगे।
उधर, बचाव पक्ष के वकीलों से यह भी पता चला कि गवाह, जो कि मृतका को अपनी बेटी बताता आ रहा था, उससे जब पूछा गया कि मृतका का जन्म कब हुआ, कहां हुआ, तो उसने कबूला कि मृतका उसकी असली बेटी नहीं है। वह रिश्ते में उसका मामा लगता था। इस पर बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि मुसलमानों में गोद लेने देने का कानून नहीं है और अदालत को गुमराह किया जा रहा है। जिरह में यह भी सामने आया कि मृतका के मरने की सूचना उसके असली माता पिता को नहीं दी गई। केस होने के बाद पता चला मृतका के असली मां बाप डर के मारे कहीं और चले गए हैं, जिनका अभी पता नहीं लग पाया है।
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