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सरकारी वकील ने गवाहों की पहले जानकारी देने संबंधी अपना जवाब सौंपा
Updated Wed, 18 Jul 2018 10:45 PM IST
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कठुआ केस
गवाहों की जानकारी पहले देने से इंकार
प्रोसिक्यूशन के वकील बोले-पहले दो गवाहों को मिल चुकी है फोन पर धमकी
कहा-सुरक्षा कारणों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते नहीं दे सकते पहले गवाहों के नाम
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। बुधवार को देर शाम करीब छह बजे तक कठुआ अपहरण, हत्या और दुराचार के केस की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दाखिल अपील में सरकारी वकीलों से गवाहों के नाम कम से कम एक दिन पहले बताने की मांग की थी, इसका जवाब सरकारी वकीलों ने कोर्ट में दाखिल किया। इस बाबत जानकारी देते हुए सरकारी वकील संतोख सिंह बसरा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा कारणों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार गवाहों की सुरक्षा को यकीनी बनाने तथा गवाहों को पहले मिली धमकियों के कारण इनकी जानकारी पहले देने से मना किया है।
बसरा ने बताया कि इससे पहले दो गवाहों ने लिखित रूप में एसएसपी क्राइम ब्रांच को शिकायत दी थी कि उन्हें फोन कर बयान बदलने के लिए धमकाया गया। जबकि इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील एके साहनी का कहना था कि ऐसा कुछ हुआ होता तो गवाहों ने जज साहब को क्यों नहीं बताया? वह एसएसपी के पास क्यों गए? उन्होंने कहा कि सरकारी वकील के जवाब दायर करने के बाद इसकी बहस 24 जुलाई को होगी। तब हम पूछेंगे कि 220 में से करीब 150 पुलिस वाले गवाह हैं। सभी गवाह बख्तरबंद गाड़ियों में आते हैं। ऐसे गवाहों को स्प्रेस करना (दबाकर रखना) फेयर ट्रायल की ओर इशारा नहीं करता। ऐसे में केस के फेयर ट्रायल पर सवालिया निशान लग जाएगा। साहनी ने कहा कि हमारा सिर्फ इतना कहना है कि हमसे लुका छुपी का खेल न खेलें, क्योंकि हमें अगर गवाह का पहले पता चलेगा तो इतनी जानकारी हो सकेगी कि हमें किससे जिरह करनी है।
दूसरी तरफ बुधवार को दसवें गवाह की गवाही भी पूरी हो गई और ग्यारहवें गवाह के सरकारी वकील की ओर से बयान खत्म कर दिए गए। इन पर जिरह वीरवार को होगी। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ घंटा अधिक हो जाने के बावजूद जज भी चाहते थे कि बयान पूरे हों और केस निष्पक्षता से चले। इस कारण वे कोर्ट समय के बाद भी काम करते रहे।
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कठुआ केस
गवाहों की जानकारी पहले देने से इंकार
प्रोसिक्यूशन के वकील बोले-पहले दो गवाहों को मिल चुकी है फोन पर धमकी
कहा-सुरक्षा कारणों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते नहीं दे सकते पहले गवाहों के नाम
अमर उजाला ब्यूरो
गुरदासपुर। बुधवार को देर शाम करीब छह बजे तक कठुआ अपहरण, हत्या और दुराचार के केस की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दाखिल अपील में सरकारी वकीलों से गवाहों के नाम कम से कम एक दिन पहले बताने की मांग की थी, इसका जवाब सरकारी वकीलों ने कोर्ट में दाखिल किया। इस बाबत जानकारी देते हुए सरकारी वकील संतोख सिंह बसरा ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा कारणों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार गवाहों की सुरक्षा को यकीनी बनाने तथा गवाहों को पहले मिली धमकियों के कारण इनकी जानकारी पहले देने से मना किया है।
बसरा ने बताया कि इससे पहले दो गवाहों ने लिखित रूप में एसएसपी क्राइम ब्रांच को शिकायत दी थी कि उन्हें फोन कर बयान बदलने के लिए धमकाया गया। जबकि इस संबंध में बचाव पक्ष के वकील एके साहनी का कहना था कि ऐसा कुछ हुआ होता तो गवाहों ने जज साहब को क्यों नहीं बताया? वह एसएसपी के पास क्यों गए? उन्होंने कहा कि सरकारी वकील के जवाब दायर करने के बाद इसकी बहस 24 जुलाई को होगी। तब हम पूछेंगे कि 220 में से करीब 150 पुलिस वाले गवाह हैं। सभी गवाह बख्तरबंद गाड़ियों में आते हैं। ऐसे गवाहों को स्प्रेस करना (दबाकर रखना) फेयर ट्रायल की ओर इशारा नहीं करता। ऐसे में केस के फेयर ट्रायल पर सवालिया निशान लग जाएगा। साहनी ने कहा कि हमारा सिर्फ इतना कहना है कि हमसे लुका छुपी का खेल न खेलें, क्योंकि हमें अगर गवाह का पहले पता चलेगा तो इतनी जानकारी हो सकेगी कि हमें किससे जिरह करनी है।
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दूसरी तरफ बुधवार को दसवें गवाह की गवाही भी पूरी हो गई और ग्यारहवें गवाह के सरकारी वकील की ओर से बयान खत्म कर दिए गए। इन पर जिरह वीरवार को होगी। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ घंटा अधिक हो जाने के बावजूद जज भी चाहते थे कि बयान पूरे हों और केस निष्पक्षता से चले। इस कारण वे कोर्ट समय के बाद भी काम करते रहे।
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