{"_id":"5ae0ad194f1c1b54098b66da","slug":"101524673817-amritsar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परीक्षा में फेल होने पर छात्र ने पंखे से लटककर की आत्महत्या","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
परीक्षा में फेल होने पर छात्र ने पंखे से लटककर की आत्महत्या
Updated Wed, 25 Apr 2018 10:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परीक्षा में फेल होने पर छात्र ने फंदा लगाया
तरनतारन। गांव सरहाली में बारहवीं कक्षा के एक छात्र ने परीक्षा में फेल होने पर घर के पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से समय छात्र घर में अकेला था।
गांव सरहाली के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र 17 वर्षीय जगजीत सिंह ने मंगलवार को वेबसाइट पर अपना परीक्षा परिणाम देखा। फेल होने के कारण वह तनाव में आ गया। इसकेबाद जगजीत सिंह ने उस समय पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या की तक घर में कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। उसके परिजन जालंधर में किसी रिश्तेदार के पास गए थे। मृतक छात्र जगजीत सिंह के रिश्तेदार कश्मीर सिंह और लखविंदर सिंह ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग की गलत नीतियों के कारण इस बार बारहवीं का रिजल्ट बेहद खराब आया है। स्कूल में छात्रों को मार्च-अप्रैल में पढ़ने के लिए दी जाने वाली किताबें अक्टूबर-नवंबर में दी गई। जिले शिक्षकों की 45 प्रतिशत की कमी ने रही सही कसर पूरी कर दी। सरकार की गलत शिक्षा नीतियों का खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन
तरनतारन। गांव सरहाली में बारहवीं कक्षा के एक छात्र ने परीक्षा में फेल होने पर घर के पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से समय छात्र घर में अकेला था।
गांव सरहाली के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र 17 वर्षीय जगजीत सिंह ने मंगलवार को वेबसाइट पर अपना परीक्षा परिणाम देखा। फेल होने के कारण वह तनाव में आ गया। इसकेबाद जगजीत सिंह ने उस समय पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या की तक घर में कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। उसके परिजन जालंधर में किसी रिश्तेदार के पास गए थे। मृतक छात्र जगजीत सिंह के रिश्तेदार कश्मीर सिंह और लखविंदर सिंह ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग की गलत नीतियों के कारण इस बार बारहवीं का रिजल्ट बेहद खराब आया है। स्कूल में छात्रों को मार्च-अप्रैल में पढ़ने के लिए दी जाने वाली किताबें अक्टूबर-नवंबर में दी गई। जिले शिक्षकों की 45 प्रतिशत की कमी ने रही सही कसर पूरी कर दी। सरकार की गलत शिक्षा नीतियों का खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन