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कलाम का निधन, गांव के किसी भी घर में नहीं जले चूल्हे
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Tue, 28 Jul 2015 10:07 PM IST
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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के बाद मंगलवार को जिले के गांव गहरी बुट्टर के किसी घर में चूल्हे नहीं जले। पूर्व राष्ट्रपति के निधन की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया।
पंजाब का यह पहला गांव है, जहां पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम पहली बार पहुंचे थे। उन्होंने 10 दिसंबर 2005 को गांव गहरी बुट्टर में दौरा किया था। उन्होंने इस गांव को एक लाइब्रेरी और एक करोड़ देने का भी ऐलान किया था।
इससे गांव की तस्वीर ही बदल गई। ग्राम पंचायत की सदस्य रंजीत कौर ने बताया कि गांव के लोग राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का इस एहसान को कभी भुला नहीं पाएंगे।
सरपंच सुखपाल सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की ओर से गांव को दी गई एक करोड़ की ग्रांट से सभी गलियां पक्की कर दी गई। साथ ही गांव की फिरनी पर सड़क और धर्मशाला को जाने वाले रास्ते को भी बना दिया। इसके साथ गांव में लाइब्रेरी भी अब्दुल कलाम के नाम पर ही बनी हुई है।
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उधर, गांव गहरी बुट्टर के लोग उनके निधन पर बेहद दुखी हैं। पूरे गांव में किसी भी घर में रोटी नहीं पकाई गई। सरपंच सुखपाल कौर ने बताया कि उनके गांव की दलितों की ओर कोई ध्यान नहीं देता था, लेकिन जब पूर्व राष्ट्रपति उनके गांव में आए थे तो उन्होंने उक्त बस्ती को भी सुधार दिया।
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पंजाब का यह पहला गांव है, जहां पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम पहली बार पहुंचे थे। उन्होंने 10 दिसंबर 2005 को गांव गहरी बुट्टर में दौरा किया था। उन्होंने इस गांव को एक लाइब्रेरी और एक करोड़ देने का भी ऐलान किया था।
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इससे गांव की तस्वीर ही बदल गई। ग्राम पंचायत की सदस्य रंजीत कौर ने बताया कि गांव के लोग राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का इस एहसान को कभी भुला नहीं पाएंगे।
सरपंच सुखपाल सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की ओर से गांव को दी गई एक करोड़ की ग्रांट से सभी गलियां पक्की कर दी गई। साथ ही गांव की फिरनी पर सड़क और धर्मशाला को जाने वाले रास्ते को भी बना दिया। इसके साथ गांव में लाइब्रेरी भी अब्दुल कलाम के नाम पर ही बनी हुई है।
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उधर, गांव गहरी बुट्टर के लोग उनके निधन पर बेहद दुखी हैं। पूरे गांव में किसी भी घर में रोटी नहीं पकाई गई। सरपंच सुखपाल कौर ने बताया कि उनके गांव की दलितों की ओर कोई ध्यान नहीं देता था, लेकिन जब पूर्व राष्ट्रपति उनके गांव में आए थे तो उन्होंने उक्त बस्ती को भी सुधार दिया।