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बादल परिवार का बहिष्कार करें पंजाबी : ढींढसा
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अमृतसर। शिअद (डी) के अध्यक्ष और सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने पंजाबियों से बादल परिवार व शिअद (ब) की लीडरशिप का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। ढींढसा रविवार को सुल्तानविंड रोड स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा अटारी साहिब में लापता 328 पावन स्वरूपों के मामले में रखे गए पश्चाताप समागम में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
इस दौरान ढींढसा ने कहा कि एसजीपीसी के वर्तमान निजाम को लापता पावन स्वरूपों के मामले का हिसाब संगत को देना होगा। एसजीपीसी ने लापता पावन स्वरूपों के आरोपी एसजीपीसी कर्मचारियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई न की तो एसजीपीसी में सत्ता परिवर्तन के बाद उनसे हिसाब मांगा जाएगा। ढींढसा के अनुसार एसजीपीसी चुनाव के लिए वह सभी पंथक और बादल विरोधी संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। एसजीपीसी चुनाव से पहले सभी दल एकजुट होकर बादल परिवार का मुकाबला करने के लिए सहमत हैं। उनकी पार्टी के संविधान के अनुसार एसजीपीसी का चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। एक सवाल के जवाब में ढींढसा ने कहा कि एसजीपीसी चुनाव में बादल परिवार को हराने के लिए एक पंथक एजेंडा संगत के सामने रखा जाएगा। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया, पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां, निधड़क सिंह बराड़, रंजीत सिंह तलवंडी, भाई मोहकम सिंह और भाई अमरीक सिंह अजनाला भी मौजूद रहे।
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इस दौरान ढींढसा ने कहा कि एसजीपीसी के वर्तमान निजाम को लापता पावन स्वरूपों के मामले का हिसाब संगत को देना होगा। एसजीपीसी ने लापता पावन स्वरूपों के आरोपी एसजीपीसी कर्मचारियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई न की तो एसजीपीसी में सत्ता परिवर्तन के बाद उनसे हिसाब मांगा जाएगा। ढींढसा के अनुसार एसजीपीसी चुनाव के लिए वह सभी पंथक और बादल विरोधी संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। एसजीपीसी चुनाव से पहले सभी दल एकजुट होकर बादल परिवार का मुकाबला करने के लिए सहमत हैं। उनकी पार्टी के संविधान के अनुसार एसजीपीसी का चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। एक सवाल के जवाब में ढींढसा ने कहा कि एसजीपीसी चुनाव में बादल परिवार को हराने के लिए एक पंथक एजेंडा संगत के सामने रखा जाएगा। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया, पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां, निधड़क सिंह बराड़, रंजीत सिंह तलवंडी, भाई मोहकम सिंह और भाई अमरीक सिंह अजनाला भी मौजूद रहे।
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