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स्टेम सेल थेरेपी से चलने फिरने में सक्षम हुआ मरीज

Wed, 29 Nov 2017 10:54 PM IST
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:54 PM IST
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स्टेम सेल थेरेपी से चलने फिरने में सक्षम हुआ मरीज
स्टेम सेल थेरेपी से चलने लगा मरीज
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साढ़े तीन साल पहले जांघ में फ्रेक्चर से व्हीलचेयर पर बैठने को विवश हुए थे राकेश
ढाई साल तक नहीं हुआ सुधार, स्टेम सेल ने पांच माह में कर दिखाया
पठानकोट।
स्टेम सेल थेरेपी की मदद से मुंबई के एक मेडिकल संस्थान ने शहर के 32 वर्षीय राकेश सिंह की करीब साढ़े तीन साल पुरानी बीमारी का इलाज पांच महीने में करने का दावा किया है। पेशे से उद्यमी राकेश सिंह साल 2014 में बाएं जांघ में फ्रेक्चर के कारण चलना फिरना तो दूर की बात खड़े होने में भी असमर्थ हो गए थे।
करीब ढाई साल तक इधर-उधर इलाज करवाने के बाद भी जब वह पैरों पर खड़े नहीं हो पाये तो सारी उम्र ही अपंग होकर बिताने की बात सोचकर वह काफी निराश हो चुके थे। इसके बाद मुंबई की न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में उन्होंने स्टेम सेल नाम की तकनीक से अपना इलाज करना शुरू किया और पांच महीने बाद ही उन्हें फर्क महसूस होने लगा और अब दस महीने बाद वह चलने फिरने में समर्थ हैं।
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स्थानीय निजी होटल में न्यूरोजन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में 32 वर्षीय राकेश सिंह ने बताया कि 2014 में उनके बाएं जांघ में फ्रेक्चर हो गया। इसके बाद वह व्हील चेयर पर पड़े रहने के लिए विवश हो गए। राकेश ने बताया कि उन्होंने पूरे भारत में कई डॉक्टरों से संपर्क किया और हरसंभव दवाओं को आजमाया, लेकिन कोई भी समस्या दूर न कर सका। फरवरी 2017 में राकेश ने न्यूरोजेन में स्टेम सेल थेरेपी शुरू करवाई। स्टेम सेल थेरेपी से पांच महीने में ही सुधार होना शुरू हो गया और करीब दस महीने के ईलाज के बाद वह वॉकर की मदद से खुद चल फिर सकते हैं।
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न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आलोक शर्मा और उप निदेशक डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन कहा कि लंबे समय से यह धारणा रही है कि स्पाइनल कॉर्ड के क्षतिग्रस्त (एससीआई) होने के कारण होनेवाली पैराप्लेजिया या क्वाड्रिप्लेजिया की समस्या के चलते व्यक्ति ताउम्र के लिए व्हीलचेयर पर सिमट कर रह जाता है या फिर जीवन भर बिस्तर पर पड़ा रहने को मजबूर हो जाता है। लेकिन अब स्टेम सेल थेरेपी के उभरते युग के साथ हम ऐसे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में फर्क ला सकते हैं और उन्हें एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा कि नवी मुंबई के नेरुल में स्थित न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट भारत का पहला और एकमात्र संस्थान है जो स्टेम सेल थेरेपी प्रदान करने के साथ ही व्यापक पुनर्वास उपलब्ध कराता है। संस्थान ने अब तक 50 से अधिक देशों के 5000 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया है।

फोटो -2- पठानकोट स्टेम सेल थेरेपी से इलाज के बारे बताते मरीज व इंस्टीट्यूट अधिकारी।
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