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आर्य महिला कालेज में सैमीनार आयोजित
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:12 PM IST
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छात्राओं को नैतिकता का महत्व बताया
आर्य महिला महाविद्यालय में सेमीनार का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट
आरआरएमके आर्य महिला महाविद्यालय में पंजाबी विभाग ने सोमवार को वाइस प्रिंसिपल डॉ. सुनीता डोगरा के नेतृत्व में विद्या एजूकेशन सोसाइटी के सहयोग से ‘नैतिकता’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। महाविद्यालय के अध्यापकों ने छात्राओं को नैतिकता की महत्व के बारे में बताया।
सेमीनार में डॉ. रूपिन्द्रजीत गिल, डॉ. कुसुम डोगरा, प्रो. तरुण महाजन, प्रो. सिम्मी शर्मा, डॉ. आरती पलटा, प्रो. कंचन, प्रो. कविता देवी, प्रो. परमजीत कौर, प्रो. रवनीत ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के युग में नैतिक मूल्य कम होते जा रहे है और इसका कम होने का मुख्य कारण युवाओं की भौतिकवाद की ओर बढ़ रही दौड़ है। नैतिक मूल्यों को समाज में बढ़ाने के लिए नैतिक शिक्षा की बहुत जरूरत है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका अध्यापकों की है, क्योंकि अध्यापक सभी छात्रों के लिए प्रेरणा स्त्रोत होते है। अध्यापक जो गतिविधि करता है, उसे सभी छात्र करते है। अध्यापकों के साथ-साथ अभिभावक भी बच्चों को नैतिक शिक्षा दें ताकि वह समाज एवं राष्ट्र का नाम ऊंचा कर सके।
नैतिक मूल्यों में वह उन्हें ईमानदारी, धीरज, सहनशीलता, अनुशासन, दयालुता, अखंडता, साथ रहना आदि को अपने जीवन में लेकर आएं, तभी वह अपना उज्ज्वल भविष्य एवं समाज को उन्नति के शिखर पर लेकर जा सकते है। सेमिनार की इंचार्ज डॉ. रूपिन्द्रजीत गिल ने कविता एवं शायरी के माध्यम से सेमिनार में उपस्थित सभी छात्राओं को जीवन में अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया। सोसाइटी के अध्यक्ष विजय पासी, सदस्य अवतार अबरोल एवं टीसी त्रेहन ने अध्यापकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वाइस प्रिंसिपल डा .सुनीता डोगरा ने कहा कि समय-समय पर हमें नैतिकता पर सेमिनार करके छात्राओं को नैतिक मूल्यों का महत्व बताना चाहिए। इस मौके पर प्रो. मीना कुमारी, प्रो. कमलेश सलारिया, डॉ. नरिंद्रा कौर, प्रो. पल्लवी महाजन, प्रो. सविता सैनी, प्रो. गीतांजलि हाजिर थीं।
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आर्य महिला महाविद्यालय में सेमीनार का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट
आरआरएमके आर्य महिला महाविद्यालय में पंजाबी विभाग ने सोमवार को वाइस प्रिंसिपल डॉ. सुनीता डोगरा के नेतृत्व में विद्या एजूकेशन सोसाइटी के सहयोग से ‘नैतिकता’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। महाविद्यालय के अध्यापकों ने छात्राओं को नैतिकता की महत्व के बारे में बताया।
सेमीनार में डॉ. रूपिन्द्रजीत गिल, डॉ. कुसुम डोगरा, प्रो. तरुण महाजन, प्रो. सिम्मी शर्मा, डॉ. आरती पलटा, प्रो. कंचन, प्रो. कविता देवी, प्रो. परमजीत कौर, प्रो. रवनीत ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के युग में नैतिक मूल्य कम होते जा रहे है और इसका कम होने का मुख्य कारण युवाओं की भौतिकवाद की ओर बढ़ रही दौड़ है। नैतिक मूल्यों को समाज में बढ़ाने के लिए नैतिक शिक्षा की बहुत जरूरत है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका अध्यापकों की है, क्योंकि अध्यापक सभी छात्रों के लिए प्रेरणा स्त्रोत होते है। अध्यापक जो गतिविधि करता है, उसे सभी छात्र करते है। अध्यापकों के साथ-साथ अभिभावक भी बच्चों को नैतिक शिक्षा दें ताकि वह समाज एवं राष्ट्र का नाम ऊंचा कर सके।
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नैतिक मूल्यों में वह उन्हें ईमानदारी, धीरज, सहनशीलता, अनुशासन, दयालुता, अखंडता, साथ रहना आदि को अपने जीवन में लेकर आएं, तभी वह अपना उज्ज्वल भविष्य एवं समाज को उन्नति के शिखर पर लेकर जा सकते है। सेमिनार की इंचार्ज डॉ. रूपिन्द्रजीत गिल ने कविता एवं शायरी के माध्यम से सेमिनार में उपस्थित सभी छात्राओं को जीवन में अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया। सोसाइटी के अध्यक्ष विजय पासी, सदस्य अवतार अबरोल एवं टीसी त्रेहन ने अध्यापकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वाइस प्रिंसिपल डा .सुनीता डोगरा ने कहा कि समय-समय पर हमें नैतिकता पर सेमिनार करके छात्राओं को नैतिक मूल्यों का महत्व बताना चाहिए। इस मौके पर प्रो. मीना कुमारी, प्रो. कमलेश सलारिया, डॉ. नरिंद्रा कौर, प्रो. पल्लवी महाजन, प्रो. सविता सैनी, प्रो. गीतांजलि हाजिर थीं।
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