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‘ये आँखें तुम्हारी गजल कह रही है, बहुत खुबसूरत है कि जैसे ये जन्नत’
Updated Sat, 14 Apr 2018 11:01 PM IST
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‘ये आँखें तुम्हारी गजल कह रही हैं, बहुत खूबसूरत है कि जैसे ये जन्नत’
देश के प्रसिद्ध गजल व संगीतकार गुलाम अब्बास खान पत्रकारों से हुए रूबरू
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट
पठानकोट शहर दो सीमाओं के साथ लगता बहुत ही सुंदर और आर्कषित इलाका है। पठानकोट भूमि अध्यामिक और संगीत क्षेत्र के साथ भी जुड़ी हुई है। यह बात आज देश के प्रसिद्ध गजल व क्लासिकल संगीतकार गुलाम अब्बास खान ने सैली रोड़ स्थित हरमोनी अकादमी में विशेष रूप से पहुंचने पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर प्रवक्ता दविंद्र पंडित व अन्य सदस्यों ने उनका स्वागत किया गया। गुलाम अब्बास खान ने बताया कि उनके पिता और दादा का संगीत की दुनिया में विशेष नाम है तथा भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्म भूषण अवार्ड से नवाजा गया है। उन्होंने बताया कि पठानकोट में वह सेना के दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। उनकी खुशकिस्मती है कि देश की सुरक्षा में लगी सेना के लिए उन्हें कुछ करने का मौका मिला। गुलाम अब्बास खान ने मौके पर अपनी गजलों के संग्रह जिसमें उन्होंने अपनी सबसे बेहतर गजल ‘ये आंखें तुम्हारी गजल कह रही हैं, बहुत खूबसूरत है कि जैसे ये जन्नत’ और अन्य दूसरी जानकारी देते हुए कहा कि पठानकोट शहर में आकर उन्हें अपनेपन का अहसास होता है। उन्होंने कहा कि वह अफगानिस्तान के रहने वाले है और भारज पाकिस्तान बंटवारे के दौरान अपना बचपन कुछ समय के लिए पठानकोट में बिताया। जिसके कारण पठानकोट की धरती से उनका खासा लगाव है। पठानकोट आने पर उन्होंने मेयर अनिल वासुदेवा के साथ ही शम्मी चैधरी व दविंद्र पंडित का धन्यवाद किया, जो संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की ओर अग्रसर हैं।
फोटो 2, पठानकोट पहुंचने पर हरमोनी एकादमी के सदस्य स्वागत करते हुए
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देश के प्रसिद्ध गजल व संगीतकार गुलाम अब्बास खान पत्रकारों से हुए रूबरू
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट
पठानकोट शहर दो सीमाओं के साथ लगता बहुत ही सुंदर और आर्कषित इलाका है। पठानकोट भूमि अध्यामिक और संगीत क्षेत्र के साथ भी जुड़ी हुई है। यह बात आज देश के प्रसिद्ध गजल व क्लासिकल संगीतकार गुलाम अब्बास खान ने सैली रोड़ स्थित हरमोनी अकादमी में विशेष रूप से पहुंचने पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर प्रवक्ता दविंद्र पंडित व अन्य सदस्यों ने उनका स्वागत किया गया। गुलाम अब्बास खान ने बताया कि उनके पिता और दादा का संगीत की दुनिया में विशेष नाम है तथा भारत सरकार की ओर से उन्हें पद्म भूषण अवार्ड से नवाजा गया है। उन्होंने बताया कि पठानकोट में वह सेना के दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। उनकी खुशकिस्मती है कि देश की सुरक्षा में लगी सेना के लिए उन्हें कुछ करने का मौका मिला। गुलाम अब्बास खान ने मौके पर अपनी गजलों के संग्रह जिसमें उन्होंने अपनी सबसे बेहतर गजल ‘ये आंखें तुम्हारी गजल कह रही हैं, बहुत खूबसूरत है कि जैसे ये जन्नत’ और अन्य दूसरी जानकारी देते हुए कहा कि पठानकोट शहर में आकर उन्हें अपनेपन का अहसास होता है। उन्होंने कहा कि वह अफगानिस्तान के रहने वाले है और भारज पाकिस्तान बंटवारे के दौरान अपना बचपन कुछ समय के लिए पठानकोट में बिताया। जिसके कारण पठानकोट की धरती से उनका खासा लगाव है। पठानकोट आने पर उन्होंने मेयर अनिल वासुदेवा के साथ ही शम्मी चैधरी व दविंद्र पंडित का धन्यवाद किया, जो संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की ओर अग्रसर हैं।
फोटो 2, पठानकोट पहुंचने पर हरमोनी एकादमी के सदस्य स्वागत करते हुए