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अमृत भारत परियोजना: RCF कपूरथला में बन रहे 160 किमी की रफ्तार वाली वंदे भारत के सेट; मंत्री ने जानी खूबियां

Wed, 11 Sep 2024 09:43 PM IST
Ankesh Thakur अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 11 Sep 2024 09:43 PM IST
सार

रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) में 160 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली वंदे भारत ट्रेन के सेट तैयार हो रहे रहे हैं। बुधवार को केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आरसीएफ का दौरा किया। बिट्टू ने अमृत भारत परियोजना तहत बनने वाली ट्रेन उत्पादन की रिबन काटकर शुरुआत की।

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Amrit Bharat Project Sets of 160 km speed Vande Bharat train being prepared at RCF Kapurthala
ट्रेन उत्पादन का उद्घाटन करते मंत्री बिट्टू। - फोटो : संवाद

विस्तार

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बुधवार को रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) का पहला दौरा करते हुए कहा कि आरसीएफ विश्व स्तरीय यात्री डिब्बों के उत्पादन में नए मानक स्थापित करने की यात्रा जारी रखते हुए देश के रेलवे के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। 

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केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ने अमृत भारत परियोजना तहत बनने वाली ट्रेन उत्पादन की रिबन काटकर शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अमृत भारत योजना तहत बनने वाले कोच किफायती लागत पर आराम, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाएं प्रदान करके आम आदमी की आकांक्षाओं को साकार करेंगे।
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आरसीएफ कपूरथला के अपने पहले दौरे पर मीडिया से बातचीत दौरान रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने कहा कि अमृत भारत ट्रेन आम आदमी की यात्रा के लिए शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि इस साल 50 से अधिक अमृत भारत ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिनमें नॉन एसी स्लीपर होंगे। आरसीएफ की ओर से इस साल 22-22 कोचों वाले पांच अमृत भारत रैक बनाए जाएंगे। इनमें 8 स्लीपर, 11 जनरल, 1 पेंट्री, 2 एसएलआरडी और एक लोको होगा, जिसमें बर्थ की बेहतर सौंदर्यता के साथ उन्नत दिख, सीसीटीवी, बेहतर एलईडी लाइटिंग, अग्निश्मन प्रणाली, फोल्डेबल स्नैक टेबल और बोतल होल्डर, मोबाइल चार्जर और रात के दौरान किसी भी अप्रिय घटना के मामले में स्वचालित रूप से प्रकाश देने के लिए बाहरी एलईडी लाइटें होंगी।

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वंदे मेट्रो रै को जल्द दिखाई जाएगी ही हरी झंडी

बिट्टू ने कहा कि वंदे भारत और वंदे मेट्रो ट्रेन सेट, अत्याधुनिक तकनीक, समकालीन डिजाइन और बेहतर प्रदर्शन मानक वाली हाई-स्पीड रेल में भारत के प्रवेश को प्रदर्शित करते हैं, जिनका निर्माण आरसीएफ की ओर से किया जा रहा है। कम दूरी की इंटरसिटी यात्रा के लिए 130 किमी प्रति घंटे की गति क्षमता वाले 16 कोचों वाली पहली वंदे मेट्रो रैक को जल्द ही हरी झंडी दिखाई जाएगी। 4364 की वहन क्षमता वाली वंदे मेट्रो में रूट मैप इंडिकेटर, सीसीटीवी, दिव्यांगजन यात्री शौचालय, बैठने की जगह के अंदर और बाहर इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट, ट्रेन टक्कर से बचाव प्रणाली और यात्री सूचना प्रणाली भी होगी। इस साल 160 किमी प्रति घंटे की गति क्षमता वाले वंदे भारत ट्रेन सेट के 2 रैक भी बनेंगे।

शून्य से नीचे के तापमान के लिए विशेष कोच

338 किलोमीटर लंबी जम्मू-बारामूला रेलवे लाइन, ऊधमपुर-श्रीनगर- बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) भारतीय रेलवे की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसका उद्देश्य कश्मीर घाटी को जम्मू रेलवे स्टेशन और फिर देश के बाकी हिस्सों से जोड़ना है। आरसीएफ को कश्मीर घाटी के ठंडे मौसम (शून्य से नीचे के तापमान वाले क्षेत्र) के लिए कोचों को उपयुक्त बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अत्याधिक ठंड के मौसम में पानी को जमने से रोकने के लिए इन कोचों में पानी की पाइपलाइनों में सेल्फ रेगुलेटिंग हीटिंग केबल और इंन्सुलेशन प्रणाली स्थापित की गई है। इंसुलेटिंग मैटेरियल से ढकी हुई दो लेयर वाली नॉन मैटेलिक पानी की टंकियां दी गई हैं। कोचों को गर्म रखने के लिए उच्च क्षमता वाली एसी यूनिट (आरएमपीयू) भी लगाई गई है। यूएसबीआरएल सेक्शन में चलाने के लिए आरसीएफ की ओर से 2 रैक पहले ही भेजे जा चुके हैं। तीसरे रैक का निर्माण भी लगभग पूरा हो गया है।

160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाला एसपीएआरटी

केंद्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि आरसीएफ को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली सुरक्षित गति वाले स्वचालित दुर्घटना राहत वाहन (एसपीएआरटी) और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की सुरक्षित गति वाली स्वचालित इंस्पेक्शन कार (एसपीआईसी) बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। दोनों परियोजनाओं पर सभी डिजाइन का काम पूरा हो चुका हैं। इलेक्ट्रिक मोड पर स्पार्ट में केटेनरी आधारित एसी ट्रैक्शन सिस्टम, अंडरस्लंग माउंटेड इलेक्ट्रिक्स, एसी पूरी तरह से सस्पेंडेड मोटर और ट्रैक्शन कनवर्टर तथा ऑक्स कनवर्टर होगा, जो कॉम्पैक्टनेस और विश्वसनीयता के लिए एक साथ संयोजित होगा और डीजल मोड पर डीजल इंजन आधारित एसी ट्रैक्शन सिस्टम और डीजल जेनसेट में ट्रैक्शन से ऑक्स पावर होगी।

कालका-शिमला के बीच सात कोच वाली ट्रेन जल्द

कालका-शिमला टॉय ट्रेन में यात्रा के दौरान हिमाचल के सुंदर परिदृश्य का आनंद लेने के लिए 80 फीसदी बैठने की जगह वाले क्षेत्र में ग्लास और पॉली कार्बोनेट शीट के साथ पैनोरमिक विस्टाडोम सुविधा वाले नैरो गेज कोच का निर्माण शामिल है। इन ट्रेनों का ऑसिलेशन और आपातकालीन ब्रेक डिस्टेंस ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और बहुत जल्द ही सात कोच वाली यह ट्रेन कालका और शिमला के बीच चलने लगेगी। कुल 30 कोचों का निर्माण स्टेनलेस स्टील कारबॉडी शेल, एयर ब्रेक सिस्टम, नॉन एसी के लिए लीनियर पंखे, 3.5टी-हीटिंग और कूलिंग एसी यूनिट, पूरी तरह से वेस्टिब्यूल ट्रेन, निरंतर लीनियर लाइटिंग व्यवस्था और सौंदर्यपूर्ण आंतरिक सज्जा के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने 2024-25 में आरसीएफ के लिए कोच उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाकर 2401 कर दिया है और सभी आरसीएफ कर्मचारी इसे हासिल करने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। पिछले सप्ताह ही आरसीएफ ने अपना 45,000वां कोच बनाकर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जल्द ही हम 50,000वें रेलवे कोच का निर्माण पूरा होते हुए देखेंगे।
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