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अमरनाथ यात्री अस्पतालों में धक्के खाने को मजबूर
अमर उजाला चंडीगढ़/अखिल तलवार
Updated Fri, 09 May 2014 12:27 AM IST
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बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए इस बार बाबा का दर्शन करना मुश्किल हो गया है। दुर्गम पहाड़ी से होकर अमरनाथ गुफा पहुंचने की कठिनाई से भी ज्यादा समस्या उन्हें जरूरी हेल्थ सर्टिफिकेट लेने में आ रही है।
श्रद्धालुओं को सरकारी अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं। सरकार का दावा है कि चेकअप फ्री है, लेकिन ज्यादातर जगह इसकी फीस ली जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब राज्य सरकार द्वारा अधिकृत डॉक्टरों से हेल्थ सर्टिफिकेट लेना जरूरी कर दिया गया है।
इस बार राज्य सरकार ने पहले जो पैनल बनाया, उसमें गिने-चुने डॉक्टर ही थे। कई जिलों में तो एक भी डॉक्टर ऐसा नहीं था, जो अमरनाथ यात्रियों को फिटनेस सर्टिफिकेट दे सके।
श्रद्धालुओं ने सेहतमंत्री सुरजीत ज्याणी से शिकायत की कि उनके अपने जिले में कोई डॉक्टर अधिकृत नहीं है।
जिसके बाद सरकार ने सभी जिला अस्पतालों, सब-डिवीजन अस्पतालों, कम्यूनिटी हेल्थ सेंटरों के फिजीशियन और मेडिकल कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसर (मेडिसिन) को अधिकृत कर दिया, लेकिन लोगों की समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई है।
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यात्रा 28 जून से शुरू होगी और लोग अभी भी हेल्थ सर्टिफिकेट के लिए सरकारी अस्पतालों में धक्के खा रहे हैं।
बीस साल से लगातार यात्रा पर जा रहे लुधियानावासी वरिंदर वालिया इस बार नहीं जा सकेंगे। वालिया ने बताया कि कई दिन तक अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी उनके ग्रुप का सर्टिफिकेट नहीं बना।
पहले ओपीडी स्लिप के लिए सभी लोग लाइन में लगें। फिर कभी डॉक्टर नहीं है तो कभी भीड़ है। उसके बाद हर टेस्ट के लिए अलग लाइन में लगना पड़ता है। ग्रुप के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
लहरागागा की शिव भोले लंगर कमेटी के प्रधान राकेश सिंगला कहते हैं कि सरकार के आदेश के बावजूद सरकारी अस्पतालों में टेस्ट के पैसे लिए जा रहे हैं। या तो सरकार का आदेश अस्पतालों तक नहीं पहुंचा है या फिर पालन नहीं हो रहा।
दो दिन पहले ही उनके सदस्यों की सुनाम के अस्पताल में इसी बात को लेकर काफी बहस हुई। जब उन्होंने आदेश की कॉपी दी तो टेस्ट फ्री किए गए।
निजी अस्पताल भी हों पैनल में
शिव भोले लंगर कमेटी के प्रधान राकेश सिंगला कहते हैं कि अधिकृत डॉक्टरों के पैनल में निजी अस्पतालों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
दिल्ली में यही पैटर्न लागू है। जो लोग खर्च उठा सकते हैं, वे निजी अस्पतालों से सर्टिफिकेट ले रहे हैं। जिन्होंने पूरे पैकेज की फीस निर्धारित की है।
पंजाब में भी हर जिले में कुछ निजी अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में एक-एक फिजीशियन हैं, कभी उसकी कोर्ट ड्यूटी होती है तो कभी वीआईपी ड्यूटी।
आयु सीमा का विरोध
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने 13 साल से कम और 75 साल से अधिक उम्र के लोगों के यात्रा पर जाने पर पाबंदी लगा दी है। जिसका विरोध हो रहा है।
अमरनाथ यात्रा वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट राजिंदर शर्मा कहते हैं कि अगर यात्रा के दौरान मारे गए लोगों का ब्योरा लिया जाए तो इनमें सभी 25-40 साल तक के हैं।
13 साल से कम और 75 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति की यात्रा के दौरान मौत नहीं हुई। इसलिए इस शर्त को हटाया जाना चाहिए।
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श्रद्धालुओं को सरकारी अस्पतालों के धक्के खाने पड़ रहे हैं। सरकार का दावा है कि चेकअप फ्री है, लेकिन ज्यादातर जगह इसकी फीस ली जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब राज्य सरकार द्वारा अधिकृत डॉक्टरों से हेल्थ सर्टिफिकेट लेना जरूरी कर दिया गया है।
इस बार राज्य सरकार ने पहले जो पैनल बनाया, उसमें गिने-चुने डॉक्टर ही थे। कई जिलों में तो एक भी डॉक्टर ऐसा नहीं था, जो अमरनाथ यात्रियों को फिटनेस सर्टिफिकेट दे सके।
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श्रद्धालुओं ने सेहतमंत्री सुरजीत ज्याणी से शिकायत की कि उनके अपने जिले में कोई डॉक्टर अधिकृत नहीं है।
जिसके बाद सरकार ने सभी जिला अस्पतालों, सब-डिवीजन अस्पतालों, कम्यूनिटी हेल्थ सेंटरों के फिजीशियन और मेडिकल कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसर (मेडिसिन) को अधिकृत कर दिया, लेकिन लोगों की समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई है।
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यात्रा 28 जून से शुरू होगी और लोग अभी भी हेल्थ सर्टिफिकेट के लिए सरकारी अस्पतालों में धक्के खा रहे हैं।
बीस साल से लगातार यात्रा पर जा रहे लुधियानावासी वरिंदर वालिया इस बार नहीं जा सकेंगे। वालिया ने बताया कि कई दिन तक अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी उनके ग्रुप का सर्टिफिकेट नहीं बना।
पहले ओपीडी स्लिप के लिए सभी लोग लाइन में लगें। फिर कभी डॉक्टर नहीं है तो कभी भीड़ है। उसके बाद हर टेस्ट के लिए अलग लाइन में लगना पड़ता है। ग्रुप के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
लहरागागा की शिव भोले लंगर कमेटी के प्रधान राकेश सिंगला कहते हैं कि सरकार के आदेश के बावजूद सरकारी अस्पतालों में टेस्ट के पैसे लिए जा रहे हैं। या तो सरकार का आदेश अस्पतालों तक नहीं पहुंचा है या फिर पालन नहीं हो रहा।
दो दिन पहले ही उनके सदस्यों की सुनाम के अस्पताल में इसी बात को लेकर काफी बहस हुई। जब उन्होंने आदेश की कॉपी दी तो टेस्ट फ्री किए गए।
निजी अस्पताल भी हों पैनल में
शिव भोले लंगर कमेटी के प्रधान राकेश सिंगला कहते हैं कि अधिकृत डॉक्टरों के पैनल में निजी अस्पतालों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
दिल्ली में यही पैटर्न लागू है। जो लोग खर्च उठा सकते हैं, वे निजी अस्पतालों से सर्टिफिकेट ले रहे हैं। जिन्होंने पूरे पैकेज की फीस निर्धारित की है।
पंजाब में भी हर जिले में कुछ निजी अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में एक-एक फिजीशियन हैं, कभी उसकी कोर्ट ड्यूटी होती है तो कभी वीआईपी ड्यूटी।
आयु सीमा का विरोध
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने 13 साल से कम और 75 साल से अधिक उम्र के लोगों के यात्रा पर जाने पर पाबंदी लगा दी है। जिसका विरोध हो रहा है।
अमरनाथ यात्रा वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट राजिंदर शर्मा कहते हैं कि अगर यात्रा के दौरान मारे गए लोगों का ब्योरा लिया जाए तो इनमें सभी 25-40 साल तक के हैं।
13 साल से कम और 75 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति की यात्रा के दौरान मौत नहीं हुई। इसलिए इस शर्त को हटाया जाना चाहिए।