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प्रचंड जीत के हीरो भगवंत मान: राजनीति पर कटाक्ष भरी कॉमेडी से लाते थे उदास चेहरों पर खुशी, अब भी यही आस

Thu, 10 Mar 2022 11:04 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
सुशील कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 10 Mar 2022 11:04 PM IST
सार

2012 में मनप्रीत सिंह बादल की पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) में शामिल होकर उन्होंने अपना सियासी सफर शुरू किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में लहरागागा से चुनाव लडे़ किंतु हार गए थे।

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Aam Aadmi Party CM Face bhagwant mann was famous for his comedy on politics
भगवंत मान की बचपन की तस्वीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सुनाम के गांव सतौज में साधारण परिवार में जन्मे भगवंत मान ने कॉमेडी से अपने करियर की शुरुआत की। उनके पिता महिंदर सिंह शिक्षक थे। जबकि माता हरपाल कौर गृहिणी हैं। सुनाम के शहीद ऊधम सिंह सरकारी कालेज में पढ़ने के दौरान ही मान ने कॉमेडी के कंटेंट लिखने शुरू कर दिए थे। भगवंत शुरू से ही उदास चेहरों पर खुशी लाने में माहिर थे। अब देखना होगा कि क्या भगवंत मान पंजाब की खुशहाली लौटा पाएंगे? 

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भगवंत मान क्लास में ही नहीं बल्कि पूरे कालेज में सभी का दिल बहलाने के लिए मशहूर हो गए थे। नब्बे के दशक में उन्होंने अपना पहला ऑडियो कैसेट कुल्फी गरमा गरम के जरिये कॉमेडी की दुनिया में कदम रखा। इस कैसेट में लोगों के दुख तकलीफों को कॉमेडी का तड़का लगाकर पेश किया। इसके बाद कई अन्य कैसेट के जरिये उन्होंने खूब नाम कमाया। राजनीति पर कटाक्ष भरी कॉमेडी ने तो भगवंत को आसमान पर पहुंचा दिया। सरकारी लॉफ्टर चेलैंज में उन्होंने अपनी ऐसी धाक जमाई कि कॉमेडी किंग के नाम पर प्रसिद्ध हो गए। सरकारी विभागों, अधिकारियों, नेताओं की पोल खोलने के व्यंग्य भरे अंदाज का युवा वर्ग दीवाना हो गया। 

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2012 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

2012 में मनप्रीत सिंह बादल की पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) में शामिल होकर उन्होंने अपना सियासी सफर शुरू किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में लहरागागा से चुनाव लडे़ किंतु हार गए थे। बाद में आम आदमी पार्टी का दामन थामा और 2014 में संगरूर लोकसभा सीट से रिकार्ड दो लाख मतों से भी ज्यादा अंतर से जीत दर्ज कर राष्ट्रीय स्तर की सियासत में धमाकेदार एंट्री की। भगवंत ने इस दौर में विरोधी दलों पर कॉमेडी का तड़का लगाकर जमकर निशाने साधे। इससे खासतौर पर युवा बेहद पसंद करने लगे। नेताओं की टांग खींचने का लोगों ने जमकर लुतुफ उठाया। संसद में भी अपनी कविताओं के जरिये वर्तमान व्यवस्था पर कटाक्ष करते रहे हैं। 2017 में उन्होंने जलालाबाद सीट पर सुखबीर बादल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके। 2019 में लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीता। भगवंत मान पार्टी के एकमात्र सांसद चुने गए थे। पार्टी ने सीएम चेहरा घोषित कर दांव खेला और भगवंत ने प्रचंड जीत दिलाकर पार्टी के फैसले को सही साबित कर दिया है। 

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