वाराणसी(Varanasi) से गंगा(Ganga) में जल परिवहन(Waterways) के माध्यम से व्यापारी और उद्यमी अपना माल बांग्लादेश(Bangladesh) के रास्ते असम(Assam) और दक्षिण-पूर्वी देशों में भेज सकेंगे। वाराणसी(Varanasi) से बांग्लादेश(Bangladesh) होते हुए ब्रह्मपुत्र(Brhamaputra) नदी के रास्ते असमAssam) तक तीन हजार किलोमीटर के जलमार्ग को इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) विकसित कर रहा है। आईडब्ल्यूएआई(IWAI) इसके अलावा देश की अन्य 10 नदियों में भी जलमार्ग शुरू करने जा रहा है। इससे वाराणसी में व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और उद्यमी और व्यापारी वर्ग को खासा फायदा होगा। आगे की स्लाइड्स देखें...
विश्व की प्रमुख कंटेनर शिपिंग कंपनी मर्स्क(maersk) लाइन के 16 कंटेनर को वाराणसी से हल्दिया के ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाने से पहले प्राधिकरण के सदस्य यातायात शशि भूषण शुक्ला और मर्स्क लाइन के दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक स्टीव फेल्डर पत्रकारों से मुखातिब हुए। रामनगर स्थित मल्टीमोडल टर्मिनल पर फेल्डर ने कहा कि अभी कंपनी परीक्षण के तौर पर इस मार्ग का प्रयोग कर रही है। यह देखा जाएगा कि लागत क्या आ रही है।
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भारत में 64 प्रतिशत माल सड़क मार्ग से और 30 प्रतिशत माल ट्रेन से तथा चार से छह प्रतिशत माल समुद्री रास्ते से और सिर्फ एक प्रतिशत माल नदियों के रास्ते भेजा जा रहा है। यदि माल ढुलाई की संभावनाएं बढ़ती हैं तो कंपनी वाराणसी में अपना दफ्तर खोल सकती है। शुक्ला ने बताया कि उद्यमी और व्यापारी नदी के रास्ते कम माल भी भेज सकेंगे। इसके लिए फ्रेट विलेज विकसित किए जाने के साथ बड़ी शिपिंग कंपनियों की मदद ली जा रही है। 2022 तक फ्रेट विलेज विकसित कर लिया जाएगा।
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बड़े जहाज चलने के बाद अभी माल ढुलाई पर जो खर्च एक रुपये 20 पैसा आ रहा है वह घटकर 70 पैसा हो जाएगा। जल्द ही प्राधिकरण ऐसे जहाज तैयार करा रहा है जिसमे 206 कंटेनर तक भेजे जा सकेंगे। इसके लिए जर्मनी से कम गहराई में चलने वाले 13 जहाजों की डिजाइन तैयार कराया गया है। इस मौके पर परियोजना के सलाहकार इंद्रवीर सोलंकी व स्थानीय अधिकारी अरविंद कुमार मौजूद रहे।
रात में नेविगेशन सिस्टम(Navigation system) शुरू हो जाने के बाद हल्दिया तक माल पहुंचने में लगने वाला समय आधा हो जाएगा। नदियों से समुद्र तक पहुंचने के रास्ते को विकसित किया जा रहा है। सदस्य यातायात ने कहा कि गंगा में जून माह तक रो-रो सेवा शुरू हो जाएगी। इसके लिए कोचीन शिपयार्ड को 10 जहाज बनाने को कहा गया है। जल्दी ही चार जहाज मिल जाएंगे।