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वाराणसी में गंगा चेताबनी बिंदु के करीब, गलियों और छतों पर हो रहा शवदाह, घाट भी डूबे

Tue, 01 Sep 2020 05:11 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 01 Sep 2020 05:11 PM IST
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Water level increasing ganga ghat stairs sink cremation on roof and streets manikarnika ghat dashashwamedh ghat varanasi
गंगा का बढ़ता जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला

काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ते जलस्तर से लोगों की जिंदगी पर असर डाला है। गंगा खतरे के निशान के करीब बढ़ रही हैं। गंगा के रौद्र रूप ने गंगा घाट की सीढ़ियों को डुबा दिया है। नावों का संचालन तो पहले ही बंद किया जा चुका है। साथ ही अब शवदाह पर असर पड़ रहा है। दूसरी ओर दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता मंदिर की मुख्य सीढि़यां पूरी तरह डूब चुकी हैं।

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मणिकर्णिका घाट और राजा हरिश्चंद्र घाट पर गंगा पानी चढ़ गया है। अब शवदाह गलियों और छतों पर किया जा रहा है। पूर्वांचल-बिहार से अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों के लिए चार-पांच घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। इन लोगों को लंबी लाइन लगानी पड़ रही है।

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श्मशान घाट किनारे रहने वाले लोगों के लिए परेशानी दोगुनी हो गई है। आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों को शवों के दाह संस्कार से होने वाले धुंए और हवा के साथ उड़ कर घर में पहुंच रही चिताओं की राख से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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वाराणसी में गंगा वरुणा नदी विकराल रूप ले सकती हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 24 घंटे में चार सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। सुबह 8 बजे 67.45 मीटर और रात 8 बजे तीन सेंटीमीटर बढ़ाव के साथ जलस्तर 67. 48 मीटर रहा। जिले में चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है।

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वहीं श्राद्ध के लिए तीर्थ पुरोहितों को भी परेशानी हो रही है। कोरोना और गंगा के बढ़ते जस्तरस से पिशाच मोचन के तीर्थ पुरोहितों के चेहरे पर मायूसी छाई है। उनका कहना है कि वर्ष भर में पितृपक्ष का ही मौका होता है जब उनकी आमदनी के रास्ते खुलते हैं। त्रिपिंडी श्राद्ध व अनुष्ठान के लिए काशी में देश के कई हिस्सों से यजमान आते हैं लेकिन इस बार प्रशासन की रोक के कारण सन्नाटा रहेगा। न यजमान आएंगे न कोई आमदनी होगी।

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