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वाराणसी का राजघाट हादसाः खौफनाक मंजर याद कर सिहर उठते हैं लोग, गई थी 25 लोगों की जान

Thu, 15 Nov 2018 11:18 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी/लखनऊ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी/लखनऊ Updated Thu, 15 Nov 2018 11:18 AM IST
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Varanasi rajghat bridge stampede people cry after Remember  that incident
राजघाट पुल - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी का राजघाट पुल हादसा, आज से दो साल पहले का वो हादसा जिसे याद करते ही एक बारगी लोग कांप उठते हैं। धार्मिक आयोजन में उमड़ी भीड़ में अचानक भगदड़ हुई थी जिसमें 25 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मामले में वाराणसी पुलिस की तफ्तीश दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इधर,  मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट मंगलवार को यूपी कैबिनेट में पेश की गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
Varanasi rajghat bridge stampede people cry after Remember  that incident
वाराणसी - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक रिपोर्ट को विधानमंडल के पटल पर रखने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट को विधानसभा और विधान परिषद में पेश किया जाएगा। जांचकर्ता सेवानिवृत्त न्यायाधीश राजमणि चौहान ने हादसे के लिए जय गुरुदेव सत्संग और शोभायात्रा के आयोजकों और ट्रैफिक का जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों को कसूरवार ठहराया है।
Varanasi rajghat bridge stampede people cry after Remember  that incident
varanasi - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक 15 अक्तूबर, 2016 को जय गुरुदेव सत्संग व शोभायात्रा के आयोजकों ने प्रशासन से जो अनुमति ली थी, उसमें महज तीन हजार लोग इकट्ठे होने की बात कही गई थी। मगर शोभायात्रा में 25 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच गए। इतना ही नहीं, शोभायात्रा भी दो घंटे पहले यानी सवेरे आठ बजे ही शुरू कर दी गई। प्रशासन ने आयोजकों से कुछ सेवादारों के नाम भी बताने को कहा था लेकिन उन्होंने नाम नहीं बताया। दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस की ओर से पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं गई थी। इस कारण हुई भगदड़ में 25 लोगों की मौत हुई थी। 
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Varanasi rajghat bridge stampede people cry after Remember  that incident
varanasi - फोटो : अमर उजाला
राजघाट पुल पर भगदड़ में 25 लोगों की मौत के मामले में पुलिस की तफ्तीश दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। प्रकरण में नामजद दो आरोपियों के बारे में भी पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं है। ऐसे हाल में पुलिस मुकदमे के अज्ञात आरोपियों को कैसे चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी, इसका अंदाज लगाया जा सकता है। हादसे के बाद तत्कालीन डीएम विजय किरण आनंद और एसएसपी आकाश कुलहरि का तबादला कर दिया गया था। वहीं, तत्कालीन एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक, सीओ कोतवाली और थानाध्यक्ष रामनगर व मुगलसराय को निलंबित कर दिया गया था।
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Varanasi rajghat bridge stampede people cry after Remember  that incident
varanasi - फोटो : अमर उजाला
हादसे के 36 घंटे बाद 17 अक्तूबर, 2016 को रामनगर थाने में तत्कालीन थानाध्यक्ष की तहरीर पर पांच नामजद और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अगस्त, 2017 में जय गुरुदेव संगत के अध्यक्ष बेचू प्रसाद गुप्ता और कार्यक्रम के सह संयोजक यशवंत चौरसिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आयोजक मंडल के एक अन्य सदस्य सेवानिवृत्त एडीएम अवधेश मणि त्रिपाठी ने अदालत में समर्पण किया था। अवधेश मणि की उम्र और बीमारियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें 50-50 हजार के दो जमानतदार देने पर दिसंबर, 2017 में रिहा करने का आदेश किया था। वहीं, दो अन्य नामजद आरोपियों बाबूराम यादव और चरण सिंह को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। 
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