इस्लाम धर्म के पैगंबर ए हजरत मोहम्मद की पैदाइश पर सारा जहां रौशन हो उठा। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जुमेरात से ही नबी के जश्न का आगाज हो गया। मुस्लिम बाहुल्य इलाके नातिया कलाम की गूंज और सजावट से रौशन हो उठे। हर तरफ नबी-नबी की ही गूंज सुनाई दे रही थी। दिन चढ़ने के साथ ही नबी का जश्न अपने शबाब पर था। मस्जिदों में मुल्क की तरक्की और शांति के लिए सामूहिक दुआख्वानी की गई।
2 of 4
पैगंबर ए हजरत मोहम्मद की पैदाइश पर की गई दुआख्वानी।
- फोटो : अमर उजाला।
शुक्रवार को सामूहिक दुआख्वान की सदारत काजी ए शहर मौलाना गुलाम यासीन व निजामत मौलाना शकील अहमद ने किया। पैगंबर ए इस्लाम हजरत मुहम्मद मुस्तफा की यौमे पैदाइश की खुशी अकीदत के साथ मनाई गई। मुस्लिम इलाकों में रौनक देखते ही बन रही थी। कोरोना संक्रमण के कारण जुलूस तो नहीं निकले, लेकिन मस्जिदों और मोहल्लों में आयोजन किए गए। वहीं उलमा ए कराम ने तकरीर कर युवाओं को नबी की सीरत के अनुसार जिंदगी गुजारने की नसीहत दी।
3 of 4
पैगंबर ए हजरत मोहम्मद की पैदाइश पर की गई दुआख्वानी।
- फोटो : अमर उजाला।
फज्र की नमाज के बाद मस्जिदों में कुरआनख्वानी हुई और महफिल सजाई गई। रेवड़ी तालाब नगीना वाली मस्जिद के मैदान में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जलसा आयोजित हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंस और साफ-सफाई बरतने की बात कही। इस दौरान मौलाना जमील अहमद, मौलाना डॉ. शफीक अजमल, मौलाना डॉ. कमालुद्दीन, मौलाना अबू शहमा, मौलाना तारिक अंजुम आदि ने तकरीर की। मोहम्मद जकी रजवी ने नातिया कलाम पेश किया। रातभर नातिया कलाम पेश करने का सिलसिला चलता रहा।
4 of 4
पैगंबर ए हजरत मोहम्मद की पैदाइश पर की गई दुआख्वानी।
- फोटो : अमर उजाला।
एखलाक के बूते फैलाया इस्लाम
जलसे के दौरान उलमा ए कराम ने कहा कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मुहम्मद की पैदाइश अरब के मक्का शहर में 571 ईस्वी को हुई थी। नबी की पैदाइश की याद में ही ईद मिलादुन्नबी का पर्व पूरी दुनिया में मनाया जाता है। हजरत मुहम्मद सल्ल. ने मोहब्बत, एखलाक और खुलूस से इस्लाम को इस तरह सींचा की आज पूरी दुनिया में उम्मत-ए-मोहम्मदिया फैली हुई है। नबी ने अपनी उम्मत को जो भी हुक्म दिया, उससे पहले उस पर खुद अमल किया।