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Gyanvapi Case: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एलान- हम नहीं करेंगे कोर्ट के फैसले का इंतजार, कल करेंगे ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा
Fri, 03 Jun 2022 08:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 03 Jun 2022 08:41 AM IST
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Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव प्रकट हो गए हैं तो उनका पूजन-अर्चन, राग-भोग होना ही चाहिए। अपने आराध्य की पूजा के लिए न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा हम नहीं कर सकते हैं। गुरु व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आदेश पर चार जून को वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा के लिए हम ज्ञानवापी जाएंगे, जहां तक अनुमति होगी, वहां तक जाकर भगवान शिव को राग-भोग व पूजन अर्पित करेंगे। बृहस्पतिवार को द्वारका व ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केदारघाट स्थित विद्यामठ में प्रेसवार्ता में यह घोषणा की। मामला अदालत में होने और वजूखाने की कड़ी सुरक्षा के बीच पूजन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में शंकराचार्य का आदेश सर्वोपरि है। उनके आदेश का पालन होगा। शनिवार को वह कब और कैसे मस्जिद परिसर में प्रवेश करेंगे, इसकी जानकारी शुक्रवार को दी जाएगी।
ज्ञानवापी मस्जिद में कूप में मिली आकृति। इसे हिंदू पक्ष शिवलिंग और मुसलिम पक्ष फव्वारा कह रही है।
- फोटो : अमर उजाला
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शास्त्रों में प्रभु के प्रकट होते ही दर्शन करके उनकी स्तुति करने का, राग-भोग, पूजा-आरती कर भेंट चढ़ाने का नियम है। परंपरा को जानने वाले सनातनियों ने तत्काल स्तुति पूजा के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। भगवान की पूजा और राग-भोग एक दिन भी रोका नहीं जाना चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय संविधान के अनुसार भी देवता तीन वर्ष के बालक
शास्त्रों में तो यह बात बताई ही गई है कि देवता को एक दिन भी बिना पूजा के नहीं रहने देना चाहिए। भारत के संविधान में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि कोई भी प्राण प्रतिष्ठित देवता तीन वर्ष के बालक के समकक्ष होते हैं। जिस प्रकार तीन वर्ष के बालक को बिना स्नान भोजन आदि के अकेले नहीं छोड़ा जा सकता, उसी प्रकार देवता को भी राग भोग आदि उपचार पाने का संवैधानिक अधिकार है।
शास्त्रों में तो यह बात बताई ही गई है कि देवता को एक दिन भी बिना पूजा के नहीं रहने देना चाहिए। भारत के संविधान में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि कोई भी प्राण प्रतिष्ठित देवता तीन वर्ष के बालक के समकक्ष होते हैं। जिस प्रकार तीन वर्ष के बालक को बिना स्नान भोजन आदि के अकेले नहीं छोड़ा जा सकता, उसी प्रकार देवता को भी राग भोग आदि उपचार पाने का संवैधानिक अधिकार है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के विशेष प्रतिनिधि हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
शिवलिंग को फव्वारा बताकर मुसलमान भी कर रहे हिंदुओं का समर्थन
शास्त्रों में भगवान शिव के अतिरिक्त अन्य ऐसे कोई देवता नहीं है, जिनके सिर से जलधारा निकलती हो। जो मनुष्य सनातन संस्कृति को न जानते, भगवान् शिव के स्वरूप एवं उनके माहात्म्य को नहीं जानते वे किसी के सिर से पानी निकलते हुए देखकर उन्हें फव्वारा ही तो कहेंगे।
शास्त्रों में भगवान शिव के अतिरिक्त अन्य ऐसे कोई देवता नहीं है, जिनके सिर से जलधारा निकलती हो। जो मनुष्य सनातन संस्कृति को न जानते, भगवान् शिव के स्वरूप एवं उनके माहात्म्य को नहीं जानते वे किसी के सिर से पानी निकलते हुए देखकर उन्हें फव्वारा ही तो कहेंगे।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
- फोटो : अमर उजाला
मुसलमान लोग भगवान शिव को नहीं जानते और न ही उनको मानते हैं। ऐसे में वे सभी अबोध हमारे भगवान शिव को फव्वारा कहकर स्वयं यह सिद्ध कर दे रहे हैं कि वे ही भगवान शिव हैं। हमने मुगलों की बनवाई इमारतों के अनेक फव्वारों को देखा पर एक भी शिवलिंग के आकार का नहीं मिला।