पुरातन नगरी काशी में पौराणिक कुंडों की महिमा अपार है। किसी कुंड के औषधीय जल से पेट और त्वचा रोग दूर होते हैं तो किसी कुंड के जल के स्पर्श आचमन से मन के विकार। गंगा तट पर भदैनी में ऐसा ही एक पौराणिक लोलार्क कुंड है, जहां रविवार को डुबकी लगाकर सूनी गोद भरने के नि:संतान दंपतियों का तांता लग गया।
बेटे की आस में काशी में उमड़ा दंपतियों का हुजूम, लगी तीन किमी लंबी लाइन
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आलम यह है कि कुंड से करीब तीन किलोमीटर दूर तक लाइन लगी है। अब तक लाखों लोग स्नान कर चुके हैं। पति-पत्नी दोनों ने साथ में कुंड में डुबकी लगाई। सूर्य षष्ठी पर लोलार्क कुंड में पुत्र कामना के लिए स्नान दिन भर चलेगा। इस बीच एक हादसा स्नान करने आया एक हो गया। एक युवक कुंड की सीढ़ियों से फिसलकर गिर गया जिससे उसकी मौत हो गई। वह आजमगढ़ का रहने वाला था।
फलों का दान और खुशियों का वरदान। कुछ ऐसा ही भाव लेकर नि:संतान दंपतियों का हुजूम शनिवार की रात लोलार्क कुंड पर उमड़ा। मन श्रद्धा का भाव लिए श्रद्धालु मंगल गीत गाते, लोलार्केश्वर महादेव के दरबार में संतान की आस में हाजिरी लगाने पहुंचे। कोई नंगे पांव चलकर आया तो कोई बाजेगाजे के साथ।
रात 12:30 बजे महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय, सुट्टू महाराज, अलवेश पांडेय की मौजूदगी में कुंड की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा के बाद लोलार्क षष्ठी का स्नान आरंभ हो गया। स्नान के बाद दंपती अपने वस्त्रों का कुंड पर ही परित्याग कर देंगे। लोलार्क कुंड में स्नान के लिए दोपहर बाद ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। बैरीकेडिंग में महिलाएं अपने पतियों के साथ बैठी रहीं।
कुंड से लेकर सोनारपुरा तक रात को ही स्नानार्थी कतारबद्ध हो गए। अस्सी की तरफ से भी लाइन लगी थी। स्नानार्थियों की भीड़ को देखते हुए देर शाम सोनारपुरा-लंका मार्ग पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया। सिर्फ स्नानार्थी ही इस मार्ग पर चल रहे थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार लोलार्क कुंड काशी में सूर्योपासना का प्रमुख केंद्र है।