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टेक्नेक्स: 33 ग्राम के हेलिकॉप्टर में 1600 मेगापिक्सल के कैमरे, बिना आवाज दुश्मनों की लाइव स्ट्रीमिंग; PHOTOS

Sun, 15 Mar 2026 01:37 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 15 Mar 2026 01:37 PM IST
सार

Technex in IIT BHU: आईआईटी बीएचयू में आधुनिकता का आकर्षक नजारा देखने को मिला। इसमें यह दिखा गया कि भारतीय सेना के लिए हमला करने वाली जमीन भी तैयार की जा सकती है। 23 लाख का ड्रोन 30 मिनट में तीन किमी तक जाएगा।

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Technex 1,600-Megapixel Cameras in 33-Gram Helicopter Silent Live Streaming of Enemies
आधुनिक हथियारों की जानकारी लेते छात्र। - फोटो : संवाद

आईआईटी बीएचयू में टेक्नेक्स के दूसरे दिन डिफेंस सिंपोजियम 2.0 की प्रदर्शनी में 33 ग्राम के दो ड्रोन हेलीकॉप्टर रखे गए हैं। इनका नाम ब्लैक हॉर्नेट है। हवा में 200 मीटर की ऊंचाई पर 25 मिनट तक उड़ते हुए यह एक बार में दो किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इसमें दो हाई क्वालिटी 1200 और 1600 मेगापिक्सल के कैमरे लगे हैं, जो बिना शोर किए दुश्मन तक पहुंचकर उनकी लाइव स्ट्रीमिंग करेंगे।



अमेरिकी कंपनी ने इसे बनाया है, लेकिन इसकी एसेंबलिंग अब भारत में भी होने लगी है। इसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये है। वहीं दूसरा कनिस्टर-लॉन्च्ड माइक्रो ड्रोन 23 लाख रुपये का है। इसका रेंज तीन किलोमीटर है और यह सिर्फ 30 मिनट में लक्ष्य तक पहुंच जाएगा। यह लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग और तेज गति से संचालन में सक्षम है।

Technex 1,600-Megapixel Cameras in 33-Gram Helicopter Silent Live Streaming of Enemies
रोबो डाॅग ने ध्यान किया आकर्षित। - फोटो : संवाद

5200 मीटर दूर तक बंकर उड़ाएगा, माइनस 30 पर भी करेगा काम: 5200 मीटर तक बंकर तबाह करने वाले रॉकेट लॉन्चर को भारत में विकसित किया गया है। यह माइनस 30 डिग्री से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर काम कर सकता है। इसका उपयोग युद्ध में तीन मुख्य कार्यों के लिए किया जाता है। 

बंकर तबाह करने के साथ ही, रात में जंगल में रास्ता खोलने या दुश्मन का पता लगाने के लिए इसे हवा में फायर किया जाता है, जिससे पूरे 800 मीटर के क्षेत्र में उजाला फैलता है। इसके साथ ही फायरिंग का स्रोत पता नहीं चलता। गैस-ऑपरेटेड बेल्ट गन का रेंज 2000 मीटर है और इसकी कीमत छह लाख रुपये है।

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रोबो से जानकारियां लेते छात्र। - फोटो : संवाद

मार्स रोवर और पानी के नीचे चलने वाले वाहन: आईआईटी मद्रास की टीम ने मार्स रोवर प्रदर्शित किया, आईआईटी कानपुर ने ऑटोनोमस अंडरवॉटर व्हीकल प्रस्तुत किया। सेर्बोटेक ने न्यूरो-हेल्थ डिवाइस और जापान की पोर्टलग्राफ ने उन्नत 3डी मैपिंग एवं होलोग्राफिक प्रोजेक्शन सिस्टम की प्रदर्शनी लगाई।

टेक्नेक्स में आज : आईआईटी बीएचयू के एसबी हाॅल लाॅन में डिफेंस सिंपोजियम  2.0 - सुबह: 10:30 बजे
आईआईटी बीएचयू के एडीवी ग्राउंड में बाॅलीवुड गायक दर्शन रावल का शो - शाम: 6:30 बजे
 

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Technex 1,600-Megapixel Cameras in 33-Gram Helicopter Silent Live Streaming of Enemies
ब्रिगेडियर बीएम करियप्पा ने किया संबोधित। - फोटो : संवाद

पहाड़ी युद्ध में समतल रास्तों से दूर रहें, बोल्डर पर चलकर लैंड माइंस से बची जानें - बीएम करियप्पा
गैलेंट्री और वीर चक्र प्राप्त ब्रिगेडियर बीएम करियप्पा ने आईआईटी बीएचयू के टेक्नेक्स के थिंक टॉक में छात्रों के साथ कारगिल जंग की अपनी कहानी और रणनीति साझा की। सियाचिन ग्लेशियर के क्षेत्र में सेना का नेतृत्व कर चुके बीएम करियप्पा ने कहा कि उस युद्ध में जवानों से यह बताया गया कि हाथ-पैर और जान सलामत रखनी हो तो समतल जमीन पर नहीं, बल्कि बोल्डर और कंकड़-पत्थर वाली जमीन पर चलकर मिशन में आगे बढ़ो, क्योंकि समतल जमीन पर ही लैंड माइंस बिछी होती हैं। हमने कारगिल में बहुतेरे जवान लैंड माइंस के चलते ही खो दिए।

ब्रिगेडियर करियप्पा ने आगे कहा कि ऊंची बर्फीली पहाड़ियों में लड़ाई बेहद कठिन थी। हवा बहुत तेज चल रही थी। कई जगह विस्फोट हो रहे थे। एक सैनिक आगे बढ़ा तो वह लैंड माइंस पर चढ़ गया और शहीद हो गया। 

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सेना के लिए तैयार होगी जमीन। - फोटो : संवाद

उसके बाद भी आठ और सैनिकों ने कोशिश की थी। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती, हथियारों से निकलने वाली गोली का रास्ता भी बदल जाता। इसलिए सैनिकों को अपने हथियारों को फिर से जीरो करना पड़ता था। लड़ाई खत्म हुई तो वहां 53 शव मिले। 

साहस को एक सेकंड के लिए भी न छोड़ें: इन सब अनुभवों ने हमें युद्ध में धैर्य, टीमवर्क और साहस को एक सेकंड के लिए भी न छोड़ने की सीख दे दी। ब्रिगेडियर करियप्पा 1993 में पैराशूट रेजिमेंट में जाॅइन किए। 30 वर्षों तक सेवा में बने रहे। वह एनएसजी और कई देशों में प्रतिनिधि के तौर पर भी रहे।

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