जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की मौत की खबर से वाराणसी के लोग स्तब्ध हैं। उन पर शुक्रवार सुबह एक चुनावी सभा में गोली चलाई गई थी। निधन की सूचना के बाद से बनारस में जगह-जगह जापान के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आज शाम शिंजो आबे की आत्मा की शांति के लिए दशाश्वमेघ घाट पर विशेष प्रार्थना की जाएगी जहां उन्होंने 2015 में गंगा आरती की थी।
भारत दौरे पर आए तब के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दशाश्वमेघ घाट पर पीएम मोदी के साथ गंगा माता की आरती की थी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने गंगाजल हाथ में लेकर विश्व की मंगलकामना का संकल्प लिया था। इस दौरान शिंजो आबे का भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रति स्नेह सभी ने देखा था। भारत-जापान की वर्षों से चली आ रही मैत्री के प्रतीक रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर की नींव 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। 2021 में रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर का लोकर्पण के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिंजो आबे को विशेष तौर पर याद किया था।
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रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर
- फोटो : Self
पीएम मोदी और शिंजो आबे की दोस्ती के कारण दोनों देशों की मित्रता के प्रतीक के रूप में जायका (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) की तकनीकी मदद से सिगरा में रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर बना। 15 जुलाई 2021 को जब पीएम मोदी ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया था। अपने संबोधन में उन्होंने जापान की तारीफ करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को भी याद किया था।
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रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी ने कहा था कि जापान के मेरे मित्र शिंजो आबे जी ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका नाम भूला नहीं जा सकता है। कहा था कि जब शिंजो आबे प्रधानमंत्री के तौर पर काशी आए थे, तब रुद्राक्ष के आइडिया पर लंबी चर्चा हुई थी। उन्होंने तुरंत ही अपने अधिकारियों से काम करने को कहा था।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर।
- फोटो : अमर उजाला
रुद्राक्ष सेंटर को सांस्कृतिक व आधुनिक समागम के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। रुद्राक्ष कन्वेंशन की डिजाइन जापान की कंपनी ओरिएंटल कंसल्टेंट ग्लोबल ने किया है। निर्माण का काम भी जापान की ही फुजिता कॉरपोरेशन कंपनी ने किया है।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
सेंटर को सांस्कृतिक व आधुनिक समागम के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। 186 करोड़ की लागत से तैयार सेंटर शिवलिंग के आकार में निर्मित है। खुद में एक अद्वितीय कन्वेंशन सेंटर है। इसमें जापानी और भारतीय दोनों ही प्रकार की वास्तु शैलियों का संगम दिखता है।