शंभूपुर हत्याकांड के पीछे आठ साल पुरानी हत्या की कहानी सामने आ रही है। 12 अक्तूबर 2018 को काली मंदिर पर मानस पाठ के बाद भंडारे के दौरान अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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मृतकों की फाइल फोटो।
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सुनील को छह गोलियां मारी गई थीं। इस मामले में चार दोषियों को निचली अदालत से उम्रकैद की सजा मिली थी। बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिली तो दोषी जेल से बाहर आ गए। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद दोषी तरह-तरह की टिप्पणी करते थे। टिप्पणी से अरविंद और उसका परिवार परेशान रहता था।
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शंभूपुर गांव में घर के बाहर विलाप करतीं महिलाएं।
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मां श्यामला देवी ने बताया कि जब सुनील की गोली मारकर हत्या की गई थी तब अरविंद भी मौके पर मौजूद था। उसके मन में डर समाया था। बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित रहता था। उसे आशंका थी कि विरोधी उसके बेटे-बेटियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अरविंद अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी डरता था। अक्सर रिवॉल्वर साथ लेकर चलता था। इससे पहले 2016 में सुनील सिंह ने पड़ोसियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 20 सितंबर 2017 को अरविंद के अपहरण और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
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अरविंद के घर के बाहर गमगीन माहाैल।
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महेंद्र पाठक से परिचित था अरविंद, अखिलेश को नहीं जानता था
पूजा कराने पहुंचे पुरोहित महेंद्र पाठक अरविंद के परिचित थे। घनिष्ठता भी थी। करीब एक महीने पहले अरविंद की एक गाय महेंद्र को देने और कुछ दिन पहले पांच बिस्वा जमीन की बिक्री में महेंद्र की मध्यस्थता की बात भी सामने आई है। वहीं, पूजा में पहुंचे पंडित अखिलेश मिश्रा और उनके बेटे हिमांशु मिश्रा से अरविंद की पहले से पहचान नहीं थी। इसी वजह से अरविंद ने दोनों से आधार कार्ड मांगा था। परिजनों का दावा है कि अरविंद उनकी पहचान की पुष्टि करना चाहता था। आशंकित था कि कहीं दोनों को किसी साजिश के तहत तो नहीं भेजा गया। अरविंद ने महेंद्र और अखिलेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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घर के बाहर पुलिस।
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डीजीपी ने आजमगढ़ पुलिस को सराहा, बैलिस्टिक रिपोर्ट से पता चला पिता की गोली से ही हुई थी बच्चे की माैत
यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने दो बच्चियों को सुरक्षित बचाने के लिए किए गए सुनियोजित ऑपरेशन और वारदात के बाद प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही मानवीय सहायता पर आजमगढ़ पुलिस की सराहना की है।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल फील्ड क्राफ्ट का परिचय दिया। साथ ही कर्तव्य से आगे बढ़कर प्रभावित परिवारों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई है।