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तथागत की उपदेश स्थली आकर जर्मनी के राष्ट्रपति ने खुद को बताया धन्य
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Fri, 23 Mar 2018 02:06 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भारत दौरे के पहले दिन काशी आए जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ पहुंचे। यहां धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक संग्रहालय देख कर वो अभिभूत हो गए। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर ने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद हमें यह बताने, पढ़ाने के लिए कि इसी क्षेत्र से बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई। फ्रैंक वॉल्टर स्टाइनमायर ने सारनाथ स्थित पुरातात्विक धरोहरों को देखने और उनका इतिहास जानने के बाद विजिटर बुक में दर्ज किए।
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जर्मनी के राष्ट्रपति 12:50 पर सारनाथ पहुंचे और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने संग्रहालय गए। इस दौरान मुख्यालय से पहले से ही यह निर्देश था कि राष्ट्रपति को प्रमुख पांच मूर्तियां दिखाई जाएंगी। राष्ट्रपति को बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाएं, अशोक सिंह शीर्ष, भगवान बुद्ध की उपदेश मुद्रा, जैन मूर्ति और भगवान शिव का अंधकासुर वध दिखाया गया।
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इतिहास में गहरी रुचि रखने वाले राष्ट्रपति अन्य पुरातात्विक मूर्तियों के बारे में जानने से खुद को रोक नहीं सके। केश सज्जा से जुड़ी मूर्तियां रही हों या हिंदू और बौद्धों की देवी तारादेवी की, उन्होंने मौर्य और गुप्त कालीन कई मूर्तियों को गंभीरता से देखा, उसका इतिहास जाना।
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अशोक स्तंभ के रखे टूटे हिस्सों की जानकारी हासिल की। इससे आगे बढ़े तो ऐतिहासिक धरोहरों के साथ अपनी फोटो खिंचाई। फिर वह धमेख स्तूप पहुंचे। जहां उन्हें इस पवित्र स्थल का महत्व बताया गया।