मंदिरों के शहर बनारस के हर मंदिर और शिवलिंग की कहानियां अलग-अलग हैं। शहर से 10 किलोमीटर पूर्वोत्तर में विराजते हैं सारंगनाथ महादेव। सारंगनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव अपने साले ऋषि सारंगनाथ के साथ विराजमान हैं। मान्यता है कि सावन में काशीपुराधिपति काशी छोड़कर यहीं पर निवास करते हैं।
श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि सावन में सारंगनाथ के दर्शन पूजन और जलाभिषेक से उतना ही पुण्य मिलता है। जितना काशी विश्वनाथ मंदिर में मिलता है। भगवान श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ ही चर्मरोग से मुक्ति देते हैं।
मान्यता है कि जो कोई चर्मरोग से ग्रसित है वह यहां गोंद चढ़ाता है तो उसे इससे मुक्ति मिल जाती है। गर्भगृह में दो शिवलिंग है। एक शिवलिंग आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया है। मान्यता है कि एक भगवान भोले नाथ है तथा एक उनके साले सारंगदेव महाराज है।
2 of 5
सारंगनाथ महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
सारंग ऋषि ने की थी यहां कठोर तपस्या
सारंग ऋषि दक्ष प्रजापति के पुत्र थे और अपनी बहन सती से मिलने जब काशी आए तो उन्होंने घोर तपस्या की। तपस्या के कारण उनके शरीर पर छाले पड़ गए। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने सारंग ऋ षि को दर्शन दिया। वरदान मांगने को कहने पर सारंग ऋषि कहते हैं कि आप हमारे साथ यहीं रहिए। जिस पर भगवान शिव कहते हैं कि पूरे सावन मैं तुम्हारे साथ यहीं पर रहूंगा।
3 of 5
सारंगनाथ महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि सावन में बाबा विश्वनाथ यहां निवास करते हैं और जो भी व्यक्ति सावन में काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन नहीं कर पाता वह एक दिन भी यदि सारंगनाथ का दर्शन करेगा उसे काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक के बराबर पुण्य मिलेगा।
4 of 5
सारंगनाथ महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
शिव भक्तों के लिए सावन बेहद महत्वपूर्ण होता है। महाशिवरात्रि व सावन में पूजा करके महादेव का जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान शिव की नगरी काशी की बात तो और भी निराली है। यहां के कण-कण में भगवान शंकर विराजमान रहते हैं।
5 of 5
श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे कांवड़ियां
- फोटो : अमर उजाला
इधर, सावन के दूसरे दिन श्री काशी विश्वनाथ का धाम बोल-बम के घोष से गूंजता रहा। मंदिर परिक्षेत्र में कांविड़यों व शिवभक्तों के आगमन की तैयारियां अनवरत जारी हैं। चौक और गोदौलिया जाने वाले मार्ग पर दोनों तरफ स्टील की बैरिकेडिंग लगाने का काम भी पूरा हो गया है। मंदिर चौक पर भी श्रद्धालुओं के वाटर प्रूफ टेंट लगा दिया गया है।