ग्रामीण परिवेश की गृहणियां और कामकाजी महिलाएं भी स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए पसीना बहा रही हैं। ये महिलाएं शहर की महिलाओं की तरह लैगीज या ट्रैक शूट में नहीं, साड़ी में ही अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार के अलावा अन्य आसन सीख रही हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
बता दें कि मधुमेह मुक्त भारत के पीएम मोदी के अभियान का आगाज उनके संसदीय वाराणसी से ही हुआ है। ये सभी महिलाएं मधुमेह से मुक्ति के लिए योगा शिविर में आकर योगाभ्यास कर रहीं हैं। हालांकि खुले में योग शिविर में जाने से ग्रामीण महिलाएं हिचक भी रही हैं।
ये महिलाएं शहर की महिलाओं की तरह लैगीज या ट्रैक शूट में नहीं, साड़ी में ही अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार के अलावा अन्य आसन सीख रही हैं। पुरुषों की ताकझांक से उन्हें साड़ी पहन कर खुले में योग करने में संकोच भी हो रहा है।ऐसे में पंजीयन के बाद भी कई महिलाएं शिविर में नहीं पहुंच रही हैं। डॉ. शारदा सिंह का कहना है कि शिविर को जल्दी ही बारात घर में शिफ्ट कराया जाएगा।
आयुष मंत्रालय और स्वदेशी जागरण मंच के साझा अभियान में मधुमेह पीड़ित महिलाएं तेजी से जुड़ रही हैं। वाराणसी के चितईपुर के आदित्य नगर सेंटर पर पंजीकृत 1350 रोगियों में से महिलाओं की संख्या अधिक है।
सुबह पांच बजे ही महिलाएं इस केंद्र पर योग, प्राणायाम के लिए पहुंच जातीं हैं। विजय मिश्र, पूनम सिंह, सुबोध राय, आशीष टंडन, ज्ञान किशोर पांडेय, अर्चना इन सभी को योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। विश्व योग दिवस यानी 21 जून तक चिह्नित रोगियों को योगासन कराकर अभियान की सफलता का अध्ययन किया जाएगा।