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प्रशस्ति ने कथक पर पेश की कबीर की बंदगी, कबीर महोत्सव में कलाकारों ने भरे विविध रंग

Thu, 25 Feb 2021 12:10 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 25 Feb 2021 12:10 AM IST
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Prashasti presented Kabir bandagi on Kathak
प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

संत कबीर की कर्मस्थली वाराणसी के कबीरचौरा मठ मूलगादी में कबीरचौरा महोत्सव ने नया अध्याय लिखा। बुधवार की सांस्कृतिक निशा में कलाकारों ने जहां विविध रंग भरे तो दर्शकों ने भी उन रंगों को आत्मसात किया।



बुधवार को स्वकर्म संस्थान की ओर से आयोजित महोत्सव की शुरूआत महंत विवेकदास ने दीप जलाकर की। इसके बाद पं. जालपा प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जालपा प्रसाद गुरुकुल के बच्चों ने कबीर भजन के जरिए संत के संदेशों को आम जन तक पहुंचाया।
 

Prashasti presented Kabir bandagi on Kathak

दूसरी प्रस्तुति में रेवती साकलकर ने कबीर के साखी भजनों की प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति में कबीर नृत्य प्रस्तुत करने वाली प्रशस्ति तिवारी ने हर किसी के मन पर कबीर की छाप छोड़ी। आमतौर से कथक के भाव नृत्य में कृष्ण राधा, शिव दुर्गा और होली के गीतों का प्रदर्शन किया जाता है लेकिन प्रशस्ति ने कबीर के सिद्धांतों को कथक नृत्य में समेटा।

प्रशस्ति ने बंदगी नाम की प्रस्तुति से हर किसी को कबीर के संदेशों से रूबरू कराया। इस प्रस्तुति में कबीर के दोहों को कबीर के जीवन के साथ जोड़कर देखने की कोशिश की गई। संयोजन डॉ. रविंद्र सहाय और संचालन उमेश कबीर ने किया।

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