मछली माफिया रवींद्र निषाद के बाद पुलिस ने अब जौनपुर जिले में बाहुबली मुख्तार अंसारी के अन्य करीबियों की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए खुफिया इकाई को सक्रिय कर दिया गया है। पुराने राजनीतिक और कारोबारी संपर्कों को खंगाला जा रहा है। मुख्तार के संरक्षण में अवैध कारोबार कर करोड़ों की संपत्ति बनाने वालों की पहचान के बाद उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा। पुलिस का दावा है कि जल्द ही एक-दो नाम और सामने आएंगे।
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रविवार को रवींद्र निषाद की संपत्ति कुर्क करने पहुंची पुलिस की टीम।
- फोटो : अमर उजाला।
पड़ोसी जिले गाजीपुर के निवासी मुख्तार अंसारी की धमक पूरे पूर्वांचल में रही है। खासतौर से मऊ, आजमगढ़ और जौनपुर में उसके कई गुर्गे सक्रिय रहे हैं। कारोबारी लिहाज से भी बनारस के बाद जौनपुर बड़ी मंडी है। इस कारण भी मुख्तार और उसके गुर्गों की निगाह हमेशा से जौनपुर पर रही है।
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मुन्ना बजरंगी
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मुख्तार और मुन्ना बजरंगी के एक ही गिरोह से ताल्लुक रखने के कारण यहां मुख्तार की सीधी दखल तो नहीं थी, मगर उसके गुर्गे अपना काम करते रहते रहे हैं। जेल से बाहर रहने के दौरान कई व्यापारियों और प्रतिष्ठित लोगों से मुख्तार के लिए रंगदारी वसूलने की चर्चाएं खूब थीं। जेल में जाने के बाद भी गोपनीय ढंग से यह खेल चलता आ रहा है।
पुलिस की पूछताछ में भी यह स्पष्ट हो चुका है कि रवींद्र निषाद खुद मुख्तार के लिए रंगदारी वसूल करता था। हालांकि उसका दायरा मछली कारोबार और इससे संबंधित व्यवसाय तक ही ज्यादा था। कुछ गुर्गे प्रापर्टी के धंधे से जुड़े हुए हैं तो कुछ का काम सरकारी ठेकों को हासिल करना है। कारोबार में अड़ंगा लगाने वालों को वह डरा-धमका कर अपना काम बना लेते हैं।
मुख्तार के जेल में जाने के बाद इनकी सक्रियता कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन जुड़ाव बराबर बना हुआ है। अब ऐसे ही करीबियों को पुलिस तलाशने में जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों को चिह्नित भी किया जा चुका है। अब उनका विस्तृत ब्योरा जुटाया जा रहा है। वह कब से संपर्क में रहे हैं और किसी माध्यम से मुख्तार के लिए काम करते रहे हैं, इसका विवरण मिलते ही उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा।