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संघ समागम में बोले मोहन भागवत, भाग्योदय करते-करते भारत ही न बदल जाए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 19 Feb 2018 11:48 AM IST
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mohan bhagwat
- फोटो : अमर उजाला
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संघ प्रमुख ने कहा कि सारा समाज एक साथ भेद और स्वार्थ छोड़कर काम करे, ये तभी संभव है। नि:श्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करने वाले बहुत से स्वयंसेवक हैं, जो दूर कहीं जाकर संघ के लिए कार्य करते हैं और वहीं उनकी मौत भी हो जाती है। उनके लिए शोक के दो शब्द नहीं बोले जाते हैं। हिंदुत्व के आधार पर सारे देश को जोड़ना है। हमें समाज को संगठित करना है। इसके लिए वातावरण पैदा करना होगा। यह तभी संभव है जब सामूहिकता हो।
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संघ प्रमुख ने तीन संदेश स्पष्ट तौर पर दिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को व्यक्तिगत, पारिवार और समाज में विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कहा। कहा, संघ दुनिया में एकमात्र स्वयंसेवी संस्था है, जिसने सत्ता का विरोध सबसे अधिक झेला है। बावजूद इसके समाज में स्वीकार्यता से संघ का विस्तार हुआ है। तीसरा विविधता में एकता यह हमारी विशेषता है। दुनिया में जहां भारतीय गए, वहां संस्कृति और सभ्यता दी।
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संघ प्रमुख ने कहा, किसी महापुरुष, अवतार और पार्टी विशेष होने के कारण कभी लाभ नहीं होगा। स्वयंसेवकों को स्पष्ट किया कि संघ में खटने (मेहनत) पर टिकट मिलेगा, ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने प्रचारकों को इंगित किया कि वे संगठन को स्वयंसेवकों से ज्यादा समय दें।
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संघ प्रमुख ने कहा कि बीते दो सौ साल से जितने महापुरुष भारत में हुए, उतने पूरे विश्व में नहीं हुए। वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन ने महात्मा गांधी की जीवन शैली से प्रभावित होकर कहा था कि आने वाले सालों में लोग यह विश्वास नहीं करेंगे कि ऐसा भी कोई महापुरुष था। कहा, ऐसे विचार तत्व, नीतियां और नारे तब भी थे, आज भी हैं।