वाराणसी में वरुणा कॉरिडोर में अब तक 70 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है। 201 करोड़ रुपये की योजना में से 155 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। मार्च 2016 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इस कॉरीडोर की नींव रखी थी। रविवार को प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह इस कॉरिडोर का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने जरूरी निर्देश तो दिए ही मगर एक बात पर नाखुश भी हो गए। मंत्री ने जब सवाल किया तो संबंधित अधिकारी बगले झांकने लगे। आगे की स्लाइड्स में देखें.....
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सिंचाई मंत्री जब वरुणा कॉरिडोर का निरीक्षण कर रहे थे तभी उनकी नजर शिलापट्ट पर पड़ी। शिलापट्ट देखने के बाद मंत्री ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं से पूछा कि वरुणा कॉरिडोर का काम पूरा कराए बगैर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लोकार्पण करा दिया। इस पर बगले झांकने लगे। बाद में मंत्री ने कहा कि चलो ठीक है पहले काम पूरा कराओ बाद में लोकार्पण होगा।
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सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह वरुणा कॉरिडोर के काम को दिसंबर से पहले खत्म करने का निर्देश दे रहे हैं। वहीं इंजीनियरों की मानें तो बाढ़ के चलते काम जून से बाधित रहा। पानी पूरी तरह से नीचे उतरेगा तभी काम में तेजी आएगी। सवाल यह भी उठता है कि जब 30 महीने में 70 प्रतिशत काम हुआ तो इस हिसाब से बचे 30 प्रतिशत काम को पूरा कराने के लिए 13 महीने की आवश्यकता होगी। बहुत जल्दी करेंगे तब भी छह माह का समय लग जाएगा। ऐसी स्थिति में मंत्री का फरमान हवा में न हो जाए।
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मंत्री ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं को हर हाल में दिसंबर से पूर्व काम पूरा कराने को कहा। बाकी 30 प्रतिशत काम पूरा कराके प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से इसका लोकार्पण कराया जाएगा। पर्याप्त धनराशि के बाद भी निर्माण कार्य की धीमी गति पर मंत्री ने नाराजगी जताई। अभियंताओं से मंत्री ने कहा कि युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर काम पूरा कराएं। वरुणा नदी को वाराणसी की पहचान बताते हुए मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो रही नदियों को बचाने का काम कर रही है। वरुणा भी विलुप्त होने की कगार पर थी। इसमें प्रदूषित और काला पानी होता था। वरुणा नदी का चैनलाइजेशन के बाद पानी के स्तर में सुधार हुआ है।
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तेजी से चल रहा वरुणा कॉरिडोर का काम।
कॉरिडोर के सौंदर्यीकरण और पौधरोपण कराने का निर्देश दिया ताकि कॉरिडोर पर आने वाले सैलानियों को अच्छा माहौल और लुक मिले। कॉरिडोर निर्माण के दौरान नदी की ओर बन रहे फुटपाथ के नीचे की मिट्टी कटान की जानकारी पर मंत्री ने सिंचाई विभाग के एमडी को निर्देश दिया कि इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखें और यदि कोई समस्या आ रही है तो उसका तत्काल निस्तारण कराएं। सिंचाई विभाग के अलावा यूपीपीसीएल के अधिकारियों को हिदायत दी कि कॉरिडोर के निर्माण कार्य की सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। लापरवाह अभियंता बख्शे नहीं जाएंगे।