काशी पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद: बोले- गौमाता के लिए वोट मांगेंगे, विपक्ष से करेंगे आग्रह; सत्ता पर बनाएंगे दबाव
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती चातुर्मास्य व्रत पूरा कर काशी पहुंचे। उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा को लेकर सत्ता से आग्रह किया जाएगा। यदि सत्ता उनकी बात नहीं सुनती है तो विपक्ष से आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातनियों को जागरूक कर पर्याप्त वोट एकत्र किए जाएंगे, ताकि राजनीतिक दल गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए बाध्य हों।
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ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए यदि सत्ता ने आवाज नहीं सुनी तो विपक्ष से आग्रह किया जाएगा। सनातनियों को जागृत कर गौमाता के पक्ष में इतना जनसमर्थन जुटाया जाएगा कि राजनीतिक दल उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए मजबूर हों। उन्होंने काशी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही।
शंकराचार्य छत्तीसगढ़ में चातुर्मास्य व्रत पूर्ण करने के बाद बुधवार शाम काशी पहुंचे। उनके आगमन पर संतों, भक्तों और काशीवासियों ने शहनाई, ढोल और नगाड़ों के साथ स्वागत किया। इस दौरान पुष्पवर्षा भी की गई। इसके बाद श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने गौमाता के प्राणों की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करने की अपनी मांग को दोहराया।
किया सियासी तंज
उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा के मुद्दे को वह अब और मजबूती के साथ आगे बढ़ाएंगे। यदि सत्ता पक्ष उनकी मांग पर ध्यान नहीं देता है तो विपक्षी दलों से इसे आगे बढ़ाने का आग्रह किया जाएगा। शंकराचार्य ने कहा कि सनातनियों को इस मुद्दे पर जागृत किया जाएगा और गौमाता के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन जुटाने का प्रयास होगा।
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी शंकराचार्य ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मामले में मुख्य लोगों को बचाकर कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया गया है। मुख्यमंत्री के दूध का दूध और पानी का पानी करने संबंधी बयान पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब न दूध है और न पानी, बस रेत ही रेत है।
शंकराचार्य ने राम मंदिर मामले में अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि पूरे प्रकरण में वास्तविक जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाने की आवश्यकता है।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य नवरात्र तक काशी में रहेंगे। इस दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ गौमाता की रक्षा और राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मांग को लेकर भी गतिविधियां जारी रहेंगी। उनके काशी आगमन पर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला।