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प्रवासी सम्मेलन में आए मेहमानों ने कही अपने मन की बात, कुछ ऐसी रहीं प्रतिक्रियाएं
Thu, 24 Jan 2019 11:14 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: shashikant misra
Updated Thu, 24 Jan 2019 11:14 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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ट्रेड फैसिलिटेसन सेंटर से चंद कदम दूर स्थित सोएपुर गांव के मूल निवासी विकास सेठ पिछले दस सालों से अमेरिका की सिलिकॉन वैली में रहते हैं। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे विकास ने कहा कि विश्वास ही नहीं हो रहा है कि अपने शहर और गांव के पास इस तरह का भव्य आयोजन हो रहा है। अपनी काशी इतनी जल्दी बदल जाएगी, ये यकीन नहीं हो रहा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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कोरिया में रह रहे गिरीश मूल रूप से कन्या कुमारी के रहने वाले हैं। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भाग लेने के बहाने वह पहली बार काशी आए हैं। उन्होंने कहा कि जितना सुना था, काशी उससे कहीं ज्यादा सुंदर है। केंद्र और प्रदेश सरकार को बधाई कि उन्होंने ऐसा सफल आयोजन किया। जल्द ही फिर यहां आना होगा।
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आंध्र प्रदेश के रहने वाले वेद प्रकाश गूजा करीब 30 साल पहले ही पत्नी नलिनी के साथ फ्रांस में बस गए थे। उनकी पत्नी बंगलूरू की रहने वाली हैं। बताते हैं कि अपने देश में आना जाना कम हुआ लेकिन लगाव कभी कम नहीं हुआ। देश में भ्रष्टाचार समेत कई अन्य समस्याएं कम हुई है। अपने काम के लिए लोगों को परेशान नहीं होना होता है।
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मॉरीशस से प्रमिला देवी सम्मेलन में भाग लेने काशी आई हैं। वह मूलरूप से फिजी की रहने वाली हैं, लेकिन पढ़ाई दिल्ली में की है। उनका दिल्ली आनाजाना रहता है, लेकिन काशी पहली बार आई हैं। कहती हैं कि भारत में जन्म तो नहीं हुआ, लेकिन यहां अपने देश से ज्यादा प्यार मिलता है।
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गोरखपुर के रहने वाले ज्ञानबंधु शुक्ला पत्नी छाया के साथ प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं। 12 साल पहले वह ओमान में नौकरी करने गए तो वहीं के हो गए। पति और पत्नी दोनों अलग-अलग कंपनियों में नौकरी करते हैं। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की है। पूर्वांचल के काफी लोग ओमान में हैं। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को कम से कम अपने देश में आने का मौका मिल रहा है।