श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे रविवार को जब विश्व की सबसे प्राचीन धार्मिक नगरी काशी पहुंचे, तो उन्होंने काशी के कण-कण में समाए पुराधिपति भोलेनाथ की नगरी का धार्मिक महत्व समझा। और बखूबी स्वधर्म यानी बौद्ध धर्म के प्रति अनुराग प्रकट किया, तो काशी विश्वनाथ और बाबा कालभैरव के दर्शन-पूजन कर हिंदू धर्म के प्रति अटूट आस्था प्रकट की।
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मूलगंध में पूजा करते हुए श्रीलंकाई प्रधानमंत्री
- फोटो : amar ujala
यहां काशी की परंपरा के अनुसार उनका जोरदार स्वागत किया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में षोडषोपचार विधि से पूजा अर्चना की। मंदिर प्रशासन की ओर से उनको अंगवस्त्रम, प्रसाद, रुद्राक्ष की माला और बाबा की फोटो प्रदान की।
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श्रीलंकाई प्रधानमंत्री को स्मृति चिन्ह देते धर्मगुरू
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पैकेट बंद बाबा का भस्म भी दिया गया। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने विश्वनाथ कॉरिडोर के बारे में जानकारी दी। यहां से श्रीलंकाई पीएम काल भैरव के लिए रवाना हो गए जहां बाबा का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया।
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स्तूप की परिक्रमा करते श्रीलंकाई प्रधानमंत्री
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सारनाथ स्थित म्यूजियम में भारत के अतीत के गौरव को देखा। इसके बाद पुरातात्विक खंडहर परिसर का अवलोकन करते हुए धमेख स्तूप की परिक्रमा की और विश्व शांति के लिए पूजा-पाठ किया। तत्पश्चात मूलगंज कुटी बिहार के धर्मपाल सभागार में धर्मपाल द्वारा रचित किताबों का अवलोकन किया।
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बौद्ध वृक्ष की पूजा करते श्रीलंकाई प्रधानमंत्री
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बौद्ध मंदिर में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव पी शिब्ली थेरो ने खाता भेंटकर उनका स्वागत किया। तत्पश्चात भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को सिर पर रखकर आशीर्वाद दिया।