तीर्थनगरी काशी में संतान कामना के स्नान पर्व सूर्य षष्ठी पर लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए आस्था का जन सैलाब उमड़ा है। अस्सी के भदैनी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर शुक्रवार को आस्था का मेला गुलजार होगा। गुरुवार से ही लोकआस्था का स्नान आरंभ हो गया और सैकड़ों की संख्या में दंपतियों ने लोलार्क कुंड में आस्था की डुबकी लगाकर वंश वृद्धि का आशीर्वाद मांगा। वहीं, पूरे परिसर में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। 28 साल बाद ऐसा मौका आया है जब संतान सप्तमी व लोलार्क षष्ठी का महासंयोग बन रहा है।
शुक्रवार को सुबह 11:16 मिनट तक षष्ठी तिथि है। इसके तुरंत बाद सप्तमी तिथि लग जाएगी। यानि मध्यांत व्यापिनी तिथि में आने के कारण इस बार सप्तमी शुक्रवार को दोपहर में मनाई जा सकती है। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को संतान सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इसे माता पिता अपनी संतान के सुख समृद्धि व रक्षा के लिए रखते हैं।
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लोलार्क कुंड स्नान के लिए काशी में उमड़े आस्थावान
- फोटो : अमर उजाला
लोलार्क षष्ठी स्नान के लिए बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, बंगाल, नेपाल सहित आसपास के जिलों से भी आस्थावान काशी पहुंचने लगे हैं। लोलार्क षष्ठी पर मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से और लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है। बाढ़ के कारण इस वर्ष कुंड में पानी अधिक होने के कारण नगर निगम के कर्मचारी पंप लगाकर पानी को बाहर निकालने के साथ ही साफ-सफाई में जुटे हैं।
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लोलार्क कुंड पहुंचे पुलिस आयुक्त
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लोलार्क षष्ठी पर्व में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर कमिश्नरेट पुलिस सर्तक है। बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने मातहतों संग अस्सी और भदैनी क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इससे पहले कैम्प कार्यालय में पुलिस अधिकारियों संग वर्चुअल बैठक कर तैयारियों को परखा।
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लोलार्क कुंड स्नान के लिए काशी में उमड़े आस्थावान
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लोलार्क कुंड में व्रत, अनुष्ठान, स्नान-दान, फलों का बलिदान और लोलार्केश्वर महादेव के दर्शन से भगवान सूर्य की कृपा से गोद अवश्य भर जाती है। स्कंद पुराण के काशी खंड के 32वें अध्याय में उल्लेख है कि माता पार्वती ने स्वयं इस कुंड परिसर में स्थित मंदिर में शिवलिंग की पूजा की थी।
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लोलार्क कुंड स्नान के लिए काशी में उमड़े आस्थावान
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आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार एक शास्त्रीय कथा यह भी है कि विद्युन्माली दैत्य शिव का भक्त था। भगवान सूर्य ने इस राक्षस को परास्त किया। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव हाथ में त्रिशूल लेकर सूर्य की ओर दौड़े। दौड़ते समय भगवान सूर्य इसी स्थान पर पृथ्वी पर गिरे। इससे इस स्थान का नाम लोलार्क पड़ा।