बदलते वक्त के साथ कृष्ण के अलग-अलग रूप और लीलाएं देखने को मिल रही है। कोरोना काल में जहां पीपीई किट में कान्हा ने लोगों को संक्रमण से बचाव का संदेश दिया था। वहीं, इस बार नंद गोपाल बुलडोजर वाली पालकी में सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। साथ ही कान्हा राधा संग काशी की गलियों में स्कूटी से घूमते नजर आएंगे। वाराणसी के बाजारों में कृष्ण जन्माष्टमी के लिए सजे स्टालों पर अलग-अलग रूप रंग के कान्हा की अठखेलियां देखने को मिल रही है।
18 और 19 अगस्त को जन्माष्टमी पर हर कोई अपने बच्चे को कान्हा और राधा के रूप में सजाने में कसर नहीं छोड़ना चाहता। वाराणसी के काष्ठ कलाकारों ने पहली बार लकड़ी से खास पालकी को तैयार किया है जिसकी डिमांड देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों तक देखने को मिल रही है। नीचे की स्लाइड्स में देखें...
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कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर काशी में सज गए बाजार
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चा में रहा बुलडोजर अब लकड़ी के खिलौनों की दुनिया में भी ब्रांड बनकर उभरा है। इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में सजने वाली झांकी में बुलडोजर पर सवार श्रीकृष्ण की मूर्ति की जबरदस्त मांग है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका और यूरोपीय देशों से भी इस बार ऑर्डर आए हैं।
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कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर काशी में सज गए बाजार
- फोटो : अमर उजाला
कश्मीरीगंज निवासी राजेश प्रजापति ने बताया कि इस बार देश के अलावा विदेशों से अच्छी डिमांड मिली है। प्राकृतिक रंगों से तैयार लकड़ी के लड्डू-गोपाल, पालना, पंखा, सजावटी झालर शिल्पियों के हुनर का बेजोड़ नमूना है।
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कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर काशी में सज गए बाजार
- फोटो : अमर उजाला
लकड़ी के खिलौना उद्योग से जुड़े बिहारी लाल अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका के कई शहरों के अलावा यूके, नार्वे, सिंगापुर, स्पेन से बुलडोजर पर सवार श्रीकृष्ण के खिलौनों की डिमांड मिली है। इसे बनाने में 85 से अधिक शिल्पी के अलावा 13 महिला संगठन काम में जुटे हैं।
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कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर काशी में सज गए बाजार
- फोटो : अमर उजाला
वो बड़ा वाला मोरपंख दिखाना...अरे, वो पीली पोशाक दिखाइए...और वो झूला कितने का है... कुछ ऐसे ही नजारे बुधवार को बाजार में दिन भर दिखे। जन्माष्टमी से एक दिन पहले बाजार में खरीदारों की भीड़ जुटी रही।