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काशी शब्दोत्सव: आकाशीय पिंडों के बीच 60 मिनट 'राम-शक्ति' के वश में रहे 1000 युवा दर्शक, देखें तस्वीरें

Tue, 18 Nov 2025 06:01 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 18 Nov 2025 06:01 AM IST
सार

Varanasi News: काशी शब्दोत्सव के दूसरी शाम को कलाकारों के मंचन ने लोगों का मन मोह लिया। प्रस्तुति ऐसी रही लोग तालियां बजाते रह गए। रील और वीडियो बनाए गए। 

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Kashi Shabdotsav 1000 young spectators under spell of Ram-Shakti for 60 minutes amidst celestial bodies
काशी शब्दोत्सव की दूसरी शाम में मंचन करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

आकाशीय पिंडों के बीच भगवान राम में जब मां शक्ति अंतर्ध्यान हुईं तो हजारों तालियों की गड़गड़ाहट पांच मिनट तक थमी ही नहीं। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन सभागार में काशी शब्दोत्सव की दूसरी शाम कवि निराला की रचना 'राम की शक्ति पूजा' पर हुई नाट्य प्रस्तुति ने 1000 से ज्यादा युवा दर्शकों को 60 मिनट तक अपने वश में करके रखा। 



Kashi Shabdotsav 1000 young spectators under spell of Ram-Shakti for 60 minutes amidst celestial bodies
कलाकरों के भावपूर्ण मंचन ने मोहा मन। - फोटो : संवाद

नाटक खत्म होने के बाद भी युवा राम-शक्ति के संगीतमय संवादों को ही दोहराते रहे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की बीट पर लुपलुपती रंग-बिरंगी लेजर लाइट्स ने अनंत आभासीय आकाशीय पिंडों का आभास कराया और वहीं पर राम से शक्ति को मिलवाया तो वहीं नाट्य प्रस्तुति के समापन होते ही दर्शक सीट छोड़ खड़े हो गए और कलाकारों के अभिनय की प्रशंसा अपने तालियों की गड़गड़ाहट से की। फिर वही दर्शक घंटों नाटक के निर्देशक पंडित व्योमेश शुक्ल संग सेल्फी लेने के लिए उमड़े रहे।

Kashi Shabdotsav 1000 young spectators under spell of Ram-Shakti for 60 minutes amidst celestial bodies
राम की शक्ति पूजा में कलाकार। - फोटो : संवाद

इस नाटक को रूपवाणी संस्थान के कलाकारों ने 12 साल के बाद काशी में प्रस्तुत किया। दर्शकों में सबसे ज्यादा उत्साह राम-हनुमान, राम-सीता, राम-विभीषण, राम-जामवंत के संगीतमय संवाद भी दिखा। राम, लक्ष्मण और विभीषण की भूमिका में लड़कियां रहीं, ये भी कोई भांप नहीं पाया।

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Kashi Shabdotsav 1000 young spectators under spell of Ram-Shakti for 60 minutes amidst celestial bodies
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा जन मन। - फोटो : संवाद

रावण युद्ध के दौरान राम निराश हैं और हार का अनुभव कर रहे हैं। सेना भी खिन्न हो उठी है। प्रिय सीता की याद अवसाद को और घना बना रही है। वह बीते दिनों के पराक्रम और साहस के स्मरण से उमंगित होना चाहते हैं लेकिन मनोबल ध्वस्त है। शक्ति भी रावण के साथ है। देवी स्वयं रावण की ओर से लड़ रही हैं। राम ने उन्हें देख लिया है। वह मित्रों से कहते हैं कि विजय असंभव है और शोक में डूब जाते हैं। बुजुर्ग जामवंत राम की आराधन-शक्ति का आह्वान करते हैं और सलाह देते हैं कि तुम सिद्ध होकर युद्ध में उतरो।

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Kashi Shabdotsav 1000 young spectators under spell of Ram-Shakti for 60 minutes amidst celestial bodies
अद्भुत मंचन देख उत्साहित हुए लोग। - फोटो : संवाद

उधर लक्ष्मण और हनुमान आदि के नेतृत्व में घनघोर संग्राम और इधर राम की साधना जारी है। देवी को 108 नीलकमल अर्पित करने का संकल्प लिया था, लेकिन देवी चुपके से आकर आखिरी पुष्प चुरा ले जाती हैं। राम विचलित और स्तब्ध हैं, तभी उन्हें याद आता है कि उनकी आंखों को मां नीलकमल कहा करती थीं। वह अपना नेत्र अर्पित कर डालने के लिए हाथों में तीर उठा लेते हैं, तभी देवी प्रकट होती हैं और राम को रोककर आशीष देती हैं। फिर राम में ही अंतर्ध्यान हो जाती हैं।

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