अलीगढ़ में शराब से लोगों की हुई मौत के बाद वाराणसी पुलिस और आबकारी विभाग हरकत में आया है। शनिवार को कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस की ओर से अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानों पर जांच अभियान चलाया गया। इसके साथ ही पुलिस ने मलिन व कंजड़ बस्तियों और देहात क्षेत्र के ईंट भट्ठों पर चेकिंग की।
खंगाले गए शराब ठेकों के स्टाक, अलीगढ़ में शराब से हुई मौतें के बाद दुकानों की हुई जांच
अलीगढ़ के अलग-अलग दो तहसीलों में सरकारी ठेके से देसी शराब पीने के बाद बृहस्पतिवार और शुक्रवार को 27 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद से वाराणसी में पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया। देसी शराब ठेकों पर पहुंचकर रजिस्टर और स्टाक, बार कोड सहित अन्य कई प्रपत्रों की जांच पड़ताल की।
कैंट एसपीपी अभिमन्यु मांगलिक ने कैंट, शिवपुर क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया। इधर दशाश्वमेध सर्किल के एसीपी अवधेश पांडेय, चेतगंज एसीपी नितेश कुमार सिंह ने अपने-अपने क्षेत्रों में और कोतवाली एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने मैदागिन, विशेश्वरगंज, कज्जाकपुरा आदि क्षेत्रों में सरकारी ठेकों की जांच पड़ताल की।
11 साल पहले 18 से अधिक लोगों की हुई थी शराब पीने से मौत
अलीगढ़ की तरह बनारस में भी शराब के सेवन से 18 से अधिक लोगों की मौत आज से 11 साल पहले हुई थी। 17 फरवरी 2010 को कैंट थाना अंतर्गत सोयेपुर में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की जान चली गई थी। कितनों ने कराहते हुए बाद में भी दम तोड़ दिया था। एक दशक पूर्व यह घटना उस समय प्रदेश की सुर्खियों में थी। इस मामले में पूर्व सांसद जवाहर लाल जायसवाल समेत कईयों को आरोपी बनाया गया था। इस घटना के बाद से भी बनारस में शराब के सेवन से मौतें होती गई और आबकारी व पुलिस की जांच अभियान यूं ही चलता रहा।