बरसाने की मशहूर लट्ठमार होली या फिर मिथिला की कीचड़ की होली के चर्चे तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन धधकती चिताओं के बीच महाश्मशान पर होली खेलने का अड़भंगी अंदाज कहीं नहीं देखा होगा। ऐसा सिर्फ काशी में ही होता है।
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Holi With Ashes In Varanasi
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को मरघट के सन्नाटे को चिता-भस्म की होली ने चीरा। मणिकर्णिका महाश्मशान पर एक तरफ चिताएं जलती रहीं, दूसरी ओर एक-दूसरे पर भस्म-भभूत उड़ाकर लोग होली खेलते रहे।
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Holi With Ashes In Varanasi
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ढोल-झांझ पर होरी-फाग भी गूंजे और डमरू नाद के साथ लोग जी भरकर नाचे भी।रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ का गौना होता है। बाबा की चांदी की पालकी निकलने के साथ ही काशी में होली की धूम मच जाती है।
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दूसरे दिन चिता-भस्म की होली खेली जाती है। मान्यता है कि गौना कराने के दूसरे दिन बाबा विश्वनाथ ने श्मशान पर अपने गणों के साथ होली खेली थी।उसी परंपरा का निर्वाह करते हैं काशी के लोग।
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गुरुवार की दोपहर 12 बजे ढोल, झांझ, डमरू के साथ मणिकर्णिका महाश्मशान पहुंचे युवकों ने खूब होली खेली। ब्रह्मनाल, लाहौरी टोला, के लोगों ने बाबा श्मशानेश्वर महादेव के दरबार में पहले होरी, पांच फाग गीतों के जरिए बाबा की स्तुति की ।