प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ धाम की मणिमाला के मंदिरों का ऐतिहासिक दस्तावेज देश और दुनिया के सामने होगा। एएसआई भोपाल की टेंपल सर्वे टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है। पहले चरण में स्कंदपुराण के काशीखंड में वर्णित मंदिरों का दस्तावेज तैयार किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ धाम में मिले प्राचीन मंदिरों का इतिहास के दस्तावेजों को तैयार करने के लिए टेंपल सर्वे की तीन सदस्यीय टीम ने अपना काम शुरू किया है।
पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट: जीवंत होगा काशी विश्वनाथ धाम के मंदिरों का इतिहास, एएसआई ने काम शुरू किया
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परियोजना में मिले प्राचीन मंदिरों का इतिहास, उनकी प्राचीनता, उनकी विशेषता के अलावा मंदिरों के निर्माता की जानकारियां जुटाई जा रही हैं। काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के लिए खरीदे गए तीन सौ भवनों में 60 से अधिक छोटे बड़े मंदिर मिले हैं। इनमें से लगभग एक दर्जन मंदिरों की वास्तु कला बहुत ही अद्भुत है। पत्थरों को तराश कर इतनी शानदार नक्काशी उकेरी गई है, जो अपने आप में अद्भुत है। इसमें तीस मंदिर ऐसे हैं, जिनका जिक्र तो स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।
संरक्षण के लिए भी हो रही पहल
श्री काशी विश्वनाथ धाम में मिले मंदिरों का जीर्णोद्धार और संरक्षण की पहल की जा रही है। संरक्षण के कार्य में काशी हिंदू विश्वविद्यालय और संस्कृति मंत्रालय की टीम को जिम्मेदारी दी गई है।
धर्म नगरी का अहसास कराएगा बाबा का धाम
बाबा दरबार परिसर से ललिता एवं मणिकर्णिका घाट तक बनने वाला काशी विश्वनाथ धाम वास्तविक रूप से धर्म नगरी का अहसास कराएगा। वहीं दूसरी तरफ यहां आनंद कानन और रुद्र वन की परिकल्पना साकार होगी। रुद्र वन में रुद्राक्ष के 350 से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे।
तीन फीसदी क्षेत्र में होगा निर्माण
पांच लाख वर्ग फीट के कॉरिडोर एरिया में सिर्फ 30 फीसदी क्षेत्र में निर्माण होगा। कल्चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दर्शनार्थी सुविधा केंद्र अधिकतम दो मंजिला ही होंगे और ऊंचाई विश्वनाथ मंदिर के शिखर से ऊपर नहीं होगी। सुरक्षा एयरपोर्ट जैसी होगी।