गुप्त नवरात्रि का आरंभ 30 जून से हो रहा है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ आरंभ होकर नौ जुलाई को दशमी तिथि के साथ नवरात्र का समापन होगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:26 से लेकर 6:43 बजे तक रहेगा। काशी ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 58 साल के बाद गुप्त नवरात्रि पर छह महासंयोगों का निर्माण हो रहा है जो साधकों को अभीष्ट की प्राप्ति कराएगा।
ज्योतिषाचार्य आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार इस बार गुप्त नवरात्रि के पहले दिन यानी 30 जून को विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन एक साथ गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, अडाल योग और विडाल योग बन रहे हैं। इसके साथ ही पुष्य नक्षत्र का भी निर्माण हो रहा है। एक साथ इतने शुभ मुहूर्त बनना बेहद फलदायी होता है। इस शुभ मुहूर्त में यदि आप कोई भी कार्य शुरू करते हैं तो उसमें अवश्य सफलता मिलेगी। अपनी राशि के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मंत्रों का जाप करके सुख शांति एवं समृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं।
मेष: व्यक्ति मां भगवती के स्वरूप स्कंदमाता की पूजा करें, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलेगी।
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महागौरी की पूजा अर्चना कर चढ़ाए नेजा
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वृषभ: मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा करें, ललिता सहस्त्रनाम और सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ करने से समस्याओं का अंत होगा।
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कलश स्थापना
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मिथुन: मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा करें। तारा कवच पाठ और ओम शिव शक्त्तयै नम: मंत्र का 108 बार जप करें। मनोकामना पूरी होगी।
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मां कूष्मांडा
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सिंह: मां दुर्गा के कूष्मांडा देवी स्वरूप की पूजा करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सभी क्षेत्रों में सफलता मिलेगी।