पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही बरसात का असर अब बनारस में नजर आने लगा है। शनिवार को गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज गई। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर 63.70 मीटर दर्ज किया गया। शनिवार शाम गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली गंगा आरती का स्थान बदलना पड़ा। वहीं, अस्सी से राजघाट के बीच घाटों का आपसी संपर्क भी समाप्त हो गया।
केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में गंगा का जलस्तर सुबह आठ बजे 63.40 मीटर था। इसके बाद गंगा के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की गई। गंगा घाट पर बाढ़ की आशंका से किनारों पर जहां नौका सुरक्षित करने में नाविक लगे हैं, वहीं दूसरी ओर दुकानें भी अब ऊपर की ओर खिसकने लगी हैं। जलस्तर बढ़ने से वरुणा में पलट प्रवाह की आशंका से तटवासियों की चिंता बढ़ने लगी है। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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बदला विश्व प्रसिद्ध आरती का स्थल
- फोटो : अमर उजाला
दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की आरती बढ़ते जलस्तर के कारण शनिवार को अपने स्थान से पीछे संपन्न हुई। बता दें कि आरती कोविड के कारण सांकेतिक रूप से हो रही है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ेगा, आरती घाट की सीढ़ियों पर होने लगेगी। गंगा का जलस्तर ज्यादा बढ़ जाने पर आरती छत पर होने लगेगी।
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वाराणसी में 63.70 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में गंगा सहित कई पूर्वांचल की नदियों का जलस्तर अब बढ़ाव की ओर होने के साथ ही चुनौती का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने कहा है कि घाट पर स्नान करने वाले लोग बेहद सावधानी बरतें। गंगा घाट पर बाढ़ की आशंका से किनारों पर जहां नौका सुरक्षित करने में नाविक लगे हैं वहीं दूसरी ओर दुकानें भी अब ऊपर की ओर खिसक गईं हैं।
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वाराणसी में 63.70 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
शीतला घाट की सीढ़ियां भी गंगा के जलस्तर बढ़ने से पानी में समा रही हैं। वाराणसी में गंगा जलस्तर का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है। गंगा का जलस्तर बढ़ने की वजह से अस्सी से राजघाट के किनारे स्थित छोटे मंदिर और मढ़ियां पानी में समा गए हैं।
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वाराणसी में 63.70 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
- फोटो : अमर उजाला
बड़ी नावों को घाटों पर लगे पोलों और भवनों की कड़ियों से बांध दिया गया है। छोटी नावों को घाट के ऊपरी हिस्से की ओर ले जाने का काम शुरू कर दिया गया है। मांझियों का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर का असर खत्म होने के बाद किसी तरह से गंगा में नौकायन शुरू हुआ तो अब बाढ़ आ गई।