दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना, मानहु ब्रह्मानंद समाना यानी राजा दशरथ पुत्र का जन्म कानों से सुनकर मानो ब्रह्मानंद में समा गए। जब माता कौशल्या ने बाल रूप धारण करने का आग्रह किया, तब प्रभु बालक के रूप में रोने लगे। चारों भाइयों के जन्म से पूरी अयोध्या नगरी आनंदोत्सव में डूब गई। बधाई गीतों और वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच राजा दशरथ ने ब्राह्मणों को दान दिया। विश्व प्रसिद्ध रामलीला के दूसरे दिन लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाएं भी लीला प्रेमियों की अटूट आस्था को डिगा नहीं सकीं।
बारिश पर भारी आस्था: श्रद्धालुओं ने पन्नी ओढ़कर देखी रामलीला, भावुक हुए दशरथ; गूंजा राम का नारा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Aman Vishwakarma
Updated Sun, 27 Sep 2026 06:08 AM IST
सार
बारिश के बीच रामनगर की रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का मंचन हुआ। छतरी और बरसाती की ओट में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंचे। पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद राजा दशरथ के घर श्रीराम के जन्म की किलकारी गूंजी तो अयोध्या नगरी बधाई गीतों से गूंज उठी। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
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