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PHOTOS : नम आंखों से अदा हुई अलविदा की नमाज, अमन-चैन और खुशहाली की दुआ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 15 Jun 2018 11:05 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बनारस शहर भर की मस्जिदों में पूरी अकीदत और एहतेराम के साथ नमाज अदा करने के बाद बारगाह-ए-इलाही में नमाजियों ने मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ की। इससे पहले इमाम ने खुत्बा और तकरीर में अलविदा जुमा की अहमियत समझाई। ईद को रमजान का तोहफा बताया।
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कड़ी सुरक्षा और चाक चौबंद व्यवस्था के बीच सभी जगह शांतिपूर्ण ढंग से अलविदा की नमाज हुई। नमाजियों के हुजूम ने वक्त से पहले ही मस्जिदों और इबादतगाहों का रुख कर लिया था। लकदक कुर्ता पायजामा, टोपी पहने लोग मस्जिदों की ओर बढ़ते जा रहे थे। इत्र की खुशबू से कोना-कोना महका हुआ था।
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नमाज शुरू होने तक मस्जिदों में कदम रखने तक की जगह नहीं बची। मस्जिदों से लेकर सीढ़ियों, छतों पर लोगों ने नमाज अदा की। कई मस्जिदों में नमाजियों की तादाद इतनी रही कि बाहर सड़क तक कतार लग गई। धूप को देखते हुए नमाज के लिए खास इंतजाम किए गए थे। सुन्नी और शिया समुदाय के बड़े-बुजुर्ग, युवाओं के साथ बच्चे भी पूरी अकीदत के साथ अलविदा की नमाज अदा करने पहुंचे थे।
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अलविदा की तकरीर में ज्ञानवापी मस्जिद में मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि रमजान अब हमसे रुखसत हो गया। महीने भर की इस इबादत का असल मकसद यही है कि हम बाकी दिनों को भी ऐसे ही गुजारें, जैसे रमजान के दिन गुजारे। रमजान के इनाम के बदले में हमें ईद का तोहफा दिया गया है। इसी तरह मस्जिद लंगड़ा हाफिज में मौलाना जकीउल्लाह कादरी, जामा मस्जिद नदेसर में मौलाना मजहरुल हक, मुगलिया मस्जिद बादशाहबाग में मौलाना हसीन अहमद ने तकरीर की।