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काशी प्रवास पर आज आएंगे दलाई लामा, परमपावन का यह है मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

Fri, 29 Dec 2017 12:41 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 29 Dec 2017 12:41 AM IST
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Dalai lama come today in varanasi
दलाई लामा काशी प्रवास - फोटो : अमर उजाला
तिब्बती धर्मगुरु परमपावन दलाई लामा अपने चार दिवसीय प्रवास पर शुक्रवार को काशी आ रहे हैं। वे केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेंगे। आगे की स्लाइड्स देखें...


 
Dalai lama come today in varanasi
दलाई लामा काशी प्रवास - फोटो : अमर उजाला
परमपावन दिल्ली से चलकर पूर्वाह्न 11:35 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे और वहां से उनका काफिला सारनाथ के लिए रवाना होगा। दोपहर 12:20 बजे वे सारनाथ स्थित केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान परिसर में पहुंचेंगे। कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन के अनुसार धर्मगुरु दलाईलामा 30 दिसंबर को संस्थान में आयोजित ‘माइंड इन इंडियन फिलोसॉफिकल थॉट्स एंड मॉडर्न साइंस’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेंगे। 

 
Dalai lama come today in varanasi
दलाई लामा काशी प्रवास - फोटो : अमर उजाला
सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित सेमिनार को संबोधित भी करेंगे। अगले दिन 31 दिसंबर को पुन: सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक सेमिनार में शामिल होंगे। एक जनवरी, 2018 को नए साल के पहले दिन संस्थान की 50वीं जयंती पर सुबह 09:30 से 11:30 बजे तक आयोजित समारोह में शिरकत करेंगे। इसी दिन दोपहर में बोध गया के लिए हवाई मार्ग से रवाना हो जाएंगे। 

 
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Dalai lama come today in varanasi
dalai lama
दोपहर डेढ़ बजे वे बाबतपुर एयरपोर्ट से चार्टर्ड प्लेन से बोध गया जाएंगे। परमपावन के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संस्थान के ही गेस्ट हाउस में उनके रहने की व्यवस्था की गई है। उनके आगमन के मद्देनजर संस्थान की सुंदर साज-सज्जा की गई है। बौद्ध धर्म की हृदयस्थली सारनाथ में स्थापित केंद्रीय तिब्बती अध्ययन संस्थान अपने 50 साल पूरे कर रहा है। 

 
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दलाई लामा काशी प्रवास - फोटो : अमर उजाला
संस्थान के इस स्वर्णिम इतिहास के साक्षी स्वयं तिब्बती धर्मगुरु परमपावन दलाईलामा होंगे, जिन्होंने 1967 में इस संस्थान की नींव रखी थी। संस्थान जब संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में एक संघटक विभाग के तौर पर शुरू हुआ तब और आज जब इसने संस्थान से लेकर मानद विश्वविद्यालय तक का सफर तय किया और अब ये अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है, तब भी दलाई लामा इस खास मौके पर शिरकत कर रहे हैं। परमापावन दलाई लामा ने ही पांच दशक पहले इस संस्थान की परिकल्पना की थी। 

 
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