कोरोना संक्रमण ने विश्वप्रसिद्ध ‘बनारसी साड़ी’ को भी संकट में डाल दिया है। खरमास के बाद शुरू हुए लग्न में कारोबार के उठने में भी बाधा पड़ी है। ऐसे में बुनकरों के 100 करोड़ के माल डंप हो गए हैं। यही नहीं, बाहर भेजे गए माल भी वापस आने लगे हैं।
जानकार बताते हैं कि यदि ऐसा रहा तो कारोबार पर संकट और गहरा जाएगा। शादी-विवाह में बनारसी साड़ी और कपड़ों को हर वर्ग तरजीह देता है। यही वजह है कि लग्न आते ही इनकी डिमांड बढ़ जाती है। संक्रमण के चलते न तो नए माल की बुकिंग ही हुई और न ही इसकी बिक्री में तेजी आई।
माल मंगाने वाला भी पसोपेश में है और माल भेजने वाला भी। ऐसे में कारोबार कैसे गति पकड़े यह वस्त्र निर्माण कर्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है।वाराणसी में प्रति वर्ष बनारसी साड़ी का 15 सौ करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
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बनारसी साड़ी
- फोटो : amar ujala
यहां की बनारसी साड़ियां और बनारसी सूट की देश ही नहीं वरन विदेशों में भी बड़ी मांग है। लेकिन इस समय यहां से भी डिमांड नहीं के बराबर है। जो माल भेजे गए हैं वह भी पार्टी वापस भेज रही है। माल भेजने वाले को जीएसटी का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बनारसी साड़ी का निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन से लड़खड़ाया बनारसी साड़ी का कारोबार करीब डेढ़ साल बाद भी उबर नहीं सका है। बनारस में 10-12 हजार साड़ी गद्दियां हैं। चौक, कुंजगली, सुतटोला, ठठेरी बाजार, रानीकुआं, लल्लापुरा, मदनपुरा, चौखंभा, ब्रह्मनाल, रेवड़ी तालाब, लोहता जगहों पर साड़ी गद्दियां हैं। कोरोना काल में पहले से करोड़ों रुपये का नुकसान साड़ी कारोबार को हो चुका है।
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बनारसी साड़ी
- फोटो : फाइल
हैंडलूम बोर्ड के पूर्व सदस्य मकबूल हसन ने कहा कि संक्रमण के चलते माल की डिमांड नहीं के बराबर है। जो माल भेजा गया था पार्टी उसे भी वापस कर रही है। 100 करोड़ का माल डंप है।
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बनारसी साड़ी
- फोटो : अमर उजाला
मदनपुरा निवाली बनारसी साड़ियों के मैन्यूफेक्चरर हाजी अब्दुल रऊफ ताजबाबा ने कहा कि बाहर के व्यापारी इस बार कोरोना को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में कोई भी ऑर्डर नहीं मिला है। डिमांड नहीं है, लिहाजा माल तैयार नहीं हो पा रहा।