पिछले चार साल में मुख्तार अंसारी और उसके करीबियों पर हुई कार्रवाई और करोड़ों की संपत्ति जब्त होने से बाहुबली विधायक का खेमा कमजोर पड़ता जा रहा है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई और पुलिस मुठभेड़ में कई शूटरों के ढेर होते देख मुख्तार के अधिकतर करीबी अब उससे दूरी बनाने लगे हैं। कभी आदेश का इंतजार करने वाले अब संदेश भिजवाने के बाद भी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। मेराज को छोड़ दिया जाए तो मुख्तार ने जिस पर भरोसा जताया था, वह सब मुंह मोड़ रहे हैं। इसे लेकर मुख्तार खेमे में बेचैनी हैं। एसटीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि एक तरह से कहा जाए तो इस समय मुख्तार के करीबी सिर्फ सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे हैं। पूर्वांचल में कभी जिस मुख्तार अंसारी के इशारे पर सरकारें अपना निर्णय बदल लेती थीं, आज उसी मुख्तार का बना बनाया हुआ साम्राज्य ढह रहा है। देखें अगली स्लाइड्स...।
मेराज की तरह ही एक-एक कर उसके करीबी मारे जा रहे हैं। पिछले चार साल में अंतरराज्यीय गिरोह सरगना मऊ सदर विधायक मुख्तार को जितनी चोट पहुंची, उतना कभी भी वह नहीं पाया था। आर्थिक तौर पर चोट पहुंचाने के साथ ही उसके कई भरोसेमंदों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया तो कोई आपसी गैंगवार में मारा गया। अब उसके करीबी साथ छोड़ने लगे हैं।
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बसपा सांसद अतुल राय
- फोटो : अमर उजाला
कभी मुख्तार के इशारे पर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के मोबाइल टावर में तेल भराई का ठेका पट्टी देखने वाले इस समय मऊ घोसी सांसद अतुल राय ने भी किनारा कर लिया है। पिछले माह जब पंजाब से मुख्तार को यूपी जेल भेजे जाने की कवायद शुरू हुई थी तो नैनी जेल में बंद अतुल राय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताते हुए मुख्तार को नैनी जेल में स्थानांतरित नहीं करने की मांग की थी। इसके बाद से सियासी सरगर्मी बढ़ गई थी।
एसटीएफ के अधिकारी बताते हैं कि प्रयागराज के एक कुख्यात ने भी मुख्तार से दूरी बना ली है। अधिकतर गुर्गे जेल के अंदर से भी मऊ सदर विधायक की मदद करते थे लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। बिहार, झारखंड, हरियाणा, पंजाब में भी मुख्तार अपने नेटवर्क की बदौलत हर काम आसानी से कर लेता था, लेकिन अब वहां से भी निराशा ही हाथ लग रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि मेराज की हत्या के बाद से बचे-कुचे करीबी भी और दूरी बनाएंगे।
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मुन्ना बजरंगी
- फोटो : अमर उजाला
चार साल में दरकता गया मुख्तार का किला
मुख्तार को शुरुआती झटका तब लगा था, जब लखनऊ में माफिया मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे की पांच मार्च 2016 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यही नहीं, बजरंगी की परछाई कहे जाने वाले विशेश्वरगंज निवासी मोहम्मद तारिक की एक दिसंबर 2017 को लखनऊ में बदमाशों ने गोलियों से भून दिया था। साल भर के अंदर लखनऊ में हुई दोनों हत्याओं ने पूर्वांचल के जरायम जगत में हलचल मचा दी थी। अपनों को बचाने की जद्दोजहद में मुख्तार जुटा ही था कि सात महीने के अंदर नौ जुलाई 2018 को पूर्वांचल के माफिया डान मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हुई हत्या ने मुख्तार अंसारी को और अंदर से हिलाकर रख दिया।