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बनारस में होली के हुड़दंग का अंदाज है निराला, आप भी जानिए यहां की खासियतें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 01 Mar 2018 02:05 PM IST
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holi
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होली
- फोटो : अमर उजाला
भांग, पान और ठंडई की जुगलबंदी के साथ अल्हड़ मस्ती और हुल्लड़बाजी के रंगों में घुली बनारसी होली की बात ही निराली है। फागुन का सुहानापन बनारस की होली में ऐसी जीवंतता भरता है कि फिजा में रंगों का बखूबी अहसास होता है। बाबा विश्वनाथ की नगरी में फगुनी बयार भारतीय संस्कृति का दीदार कराती है, संकरी गलियों से होली की सुरीली धुन या चौराहों के होली मिलन समारोह बेजोड़ हैं।
holi in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
त्रलोक्य से न्यारी काशी नगरी की होली बाबा विश्वनाथ दरबार से शुरु होती है। रंगभरी एकादशी के दिन सभी लोग बाबा संग अबीर-गुलाल खेलते हैं। अगले दिन महाश्मशान पर चिता के भस्म से होली खेली जाती है। इसके साथ ही सभी होलियाना माहौल में रंग जाते हैं। होली का यह सिलसिला बुढ़वा मंगल तक चलता है।
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holi in varanasi
- फोटो : अमर उजाला
गंगा घाटों पर आपसी सौहार्द के बीच रंगों की खुमारी का दीदार करने देश-विदेश के सैलानी जुटते हैं। फाग के रंग और सुबह-ए-बनारस का प्रगाढ़ रिश्ता यहां की विविधताओं का अहसास कराता है। गुझिया, मालपुए, जलेबी और विविध मिठाइयों, नमकीनों की खुशबू के बीच रसभरी अक्खड़ मिजाजी और किसी को रंगे बिना नहीं छोड़ने वाली बनारस की होली नायाब है।
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rangbhari
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान जगह-जगह होली मिलन समारोहों की धूम देखने को मिलती है, जहां पर अबीर-गुलाल के बीच सभी एक-दूसरे से गले मिलते हैं। बनारस में सब कुछ बदलने के बाद भी लोग होली की मस्ती में डूबना नहीं भूलते। होली के दिन पूरे शहर की गलियों व नुक्कड़ों पर होलिका दहन के साथ ही युवकों की टोलियां फाग गाती हुई रात भर हुड़दंग करती है। कई स्थानों पर ढोल- नगाड़ों की थाप व भोजपुरी फिल्मी गीतों पर डांस होता है।