यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने दो बच्चियों को सुरक्षित बचाने के लिए किए गए सुनियोजित ऑपरेशन और वारदात के बाद प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही मानवीय सहायता पर आजमगढ़ पुलिस की सराहना की है।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल फील्ड क्राफ्ट का परिचय दिया। साथ ही कर्तव्य से आगे बढ़कर प्रभावित परिवारों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई है। यही उत्तर प्रदेश पुलिस की वास्तविक पहचान है।
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वारदात के बारे में लोगों को बताता पंडितों के साथ आया युवक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस का दायित्व केवल अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़े रहना और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग देना भी है। दूसरी तरफ, पोस्टमार्टम के साथ ही बैलिस्टिक रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि पिता अरविंद सिंह की रिवॉल्वर से चली गोली से ही बेटे शौर्य सिंह की मौत हुई थी।
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मौके पर कमरा खुलवाने का प्रयास करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीजीपी कार्यालय के मुताबिक आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व घटनास्थल पर मौजूद एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोरा ने किया। डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह लगातार समन्वय और निगरानी करते रहे।
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मृतक बबीता की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देर रात घर के भीतर से गोली चलने की आवाज आई तो बच्चों की जान पर तत्काल खतरे को भांपकर एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़ा।
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अखिलेश मिश्रा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग की तो जवाबी कार्रवाई की हुई। पुलिस ने दोनों बच्चियों को सकुशल बाहर निकाल लिया। अरविंद की तरफ से चलाई गई गोली ही 9 साल के शौर्य लगी थी। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी माैत हो गई।